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कमलेश राजहंस: उसने मुझे कांटों पे चलना सिखा दिया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            उसने मुझे कांटों पे चलना सिखा दिया 
        
                                                    
                            
मैंने उसे फूलों पे टहलना सिखा दिया 

मजदूर की गैरत का दिया कैसे बुझेगा 
जज्बात ने तूफान में जलना सिखा दिया 

रुतबा था जिस पहाड़ का आकाश की जद तक 
उसको गमों की आंच ने गलना सिखा दिया

बेटे को बड़ा देख कर बेवा को ये लगा 
उजड़े सोहाग से कोई मिलना सिखा दिया 

तंगी के नश्तरों ने जिगर फाड़ दिया था 
उम्मीद ने हर ज़ख्म को भरना सिखा दिया 

त्योहार पर बच्चे मेरे उपवास कर गये 
मैंने सभी को भूख से लड़ना सिखा दिया 

जिनको मिली बुलंदियां मगरूर हो गये 
कमलेश को सूरज ने ढलना सिखा दिया 

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