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Urdu Poetry: याद आता है बहुत याद न आने वाला

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            मेरी ख़ुशबू को हवाओं में उड़ाने वाला
        
                                                    
                            
लौट के आया नहीं छोड़ के जाने वाला

जाने किस मोड़ पे ले आई मोहब्बत मुझ को
याद आता है बहुत याद न आने वाला

प्यार के साथ मुझे ता'ने दिया करता है
तुझ में भी रंग है कुछ कुछ तो ज़माने वाला

मुद्दतें बीत गईं राह में बैठी हुई है
शहर से जा भी चुका शहर से जाने वाला

ऐसे बिछड़ा है कि मिलने की दु'आ करता है
हर मुलाक़ात पे मुँह फेर के जाने वाला

~ हिमांशी बाबरा

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