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Urdu Poetry: चराग़ हो के न हो दिल जिला के रखते हैं

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            चराग़ हो के न हो दिल जिला के रखते हैं
        
                                                    
                            
हम आँधियों में भी तेवर बला के रखते हैं

मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में
हम अपनी आँख का पानी बचा के रखते हैं

बस एक ख़ुद से ही अपनी नहीं बनी वर्ना
ज़माने भर से हमेशा निभा के रखते हैं

हमें पसंद नहीं जंग में भी चालाकी
जिसे निशाने पे रखते बता के रखते हैं

कहीं ख़ुलूस कहीं दोस्ती कहीं पे वफ़ा
बड़े क़रीने से घर को सजा के रखते हैं

~ हस्ती

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