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Hindi Ghazal: बुरा जब वक्त है सितारा डूब जाता है

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            तमाशा देखना हो तो ज़माना दौड़ आता है
        
                                                    
                            
लगे जब आग बस्ती में तो दरिया सूख जाता है

ख़ुदा न ख़्वास्ता ठोकर कहीं लग जाए तब देखो
जिसे कहते हो अपना ख़ास वह भी मुस्कराता है

मगर अब भूल जाओ चाँदनी रस्ता दिखाएगी
बुरा जब वक्त है सितारा डूब जाता है

यही आता है बस जी में लगा दूँ आग गुलशन में
अस्ल जब रूप अपना बागवाँ कोई दिखाता है

भले पतवार दे धोखा, भले मौसम हो बेगाना
अगर हो दोस्ती पक्की तो तूफाँ भी बचाता है

वही चूजा जो अंडा फोड़कर बाहर निकल आता
क़फ़स में गर रहे कुछ दिन तो उड़ना भूल जाता है

न दें गर साथ सूरज, चाँद तो मायूस मत होना
अभी घनघोर जंगल में भी जुगनू टिम-टिमाता है

~ डी. एम. मिश्र

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3 महीने पहले
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