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Urdu Poetry: बशीर बद्र की ग़ज़ल- मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला 
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला 

घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे 
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला 

तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था 
फिर उस के बा'द मुझे कोई अजनबी न मिला 
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ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने 
बस एक शख़्स को माँगा मुझे वही न मिला 

बहुत अजीब है ये क़ुर्बतों की दूरी भी 
वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला 

2 वर्ष पहले
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