विज्ञापन

Urdu Poetry: मुझे गुमाँ भी न था वक़्त यूँ हटा देगा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            मिरे बदन में छुपी आग को हवा देगा
        
                                                    
                            
वो जिस्म फूल है लेकिन मुझे जला देगा

तुम्हारे मेहरबाँ हाथों को मेरे शाने से
मुझे गुमाँ भी न था वक़्त यूँ हटा देगा

है और कौन मिरे घर में ये सवाल न कर
मिरा जवाब तिरा रंग-ए-रुख़ उड़ा देगा

चले भी आओ कि ये डूबता हुआ सूरज
चराग़ जलने से पहले मुझे बुझा देगा

खड़े हुए हैं यहाँ तो बुलंद-हिम्मत लोग
थके हुओं को भला कौन रास्ता देगा

दरों को बंद करो वर्ना आँधियों का ये ज़ोर
तुम्हारे कच्चे घरों की छतें उड़ा देगा

जहाँ सब अपने ही दामन को देखते हों 'बशीर'
उस अंजुमन में भला कौन किस को क्या देगा

~ बशीर फ़ारूक़ी

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

sunil kumar

181 कविताएं

View Profile

Anita Chaturvedi

161 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

578 कविताएं

View Profile