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UNICEF-AUF: जंगल की लकड़ियां थीं सहारा, फुटबॉल के लिए जोलिना और रोशना का जज्बा तो देखिए

काव्य डेस्क

Yuvaon Ki Baat
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                            जंगल की लकड़ियां बनीं सहारा और ऐसे जोलिना और रोशना ने अपने जोश और जज्बे से अपने प्रिय खेल फुटबॉल को चुना। वो कहती हैं कि उनके पास फुटबॉल खरीदने के पैसे भी नहीं थे, लोग कहते थे की लड़कियां यह खेल नहीं खेलतीं पर जंगल की लकड़ियां बेचकर उन्होंने फुटबॉल खरीदी और अपना सपना पूरा किया। सुनें जोलिना और रोशना के जज्बा की कहानी उन्हीं की जुबानी 
        
                                                    
                            




 
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