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आज का शब्द: पंथी और बलबीर सिंह 'रंग' की कविता- जीवन में अरमानों का आदान-प्रदान नहीं होता है

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- पंथी, जिसका अर्थ है- रास्ता चलनेवाला, राही, बटोही, किसी पंथ या संप्रदाय का अनुयायी। प्रस्तुत है बलबीर सिंह 'रंग' की कविता- जीवन में अरमानों का आदान-प्रदान नहीं होता है
        
                                                    
                            

जीवन में अरमानों का आदान-प्रदान नहीं होता है

मैंने ऐसा मनुज न देखा
अंतर में अरमान न जिसके,
मिला देवता मुझे न कोई
शाप बने वरदान न जिसके ।
पंथी को क्या ज्ञात कि
पथ की जड़ता में चेतनता है ?
पंथी के श्रम स्वेद-कणों से पथ गतिमान नहीं होता है ।
जीवन में अरमानों का आदान-प्रदान नहीं होता है ।

यदि मेरे अरमान किसी के
उर पाहन तक पहुँच न पाए,
अचरज की कुछ बात नहीं
जो जग ने मेरे गीत न गाए ।
यह कह कर संतोष कर लिया-
करता हूँ मैं अपने उर में,
अरुण-शिखा के बिना कहीं क्या स्वर्ण-विहान नहीं होता है
जीवन में अरमानों का आदान-प्रदान नहीं होता है ।

मैं ही नहीं अकेला आकुल
मेरी भाँति दुखी जन अनगिन,
एक बार सब के जीवन में
आते गायन रोदन के क्षण,
फिर भी सब के मन का सुख-दुख एक समान नहीं होता है ।
जीवन में अरमानों का आदान-प्रदान नहीं होता है ।

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