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आज का शब्द: क्षत और सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता- कौन फिर तुझको बरेगा

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- क्षत, जिसका अर्थ है- घाव, जख्म, जिसे क्षति या आघात पहुँचा हो, घायल। प्रस्तुत है सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" की कविता- कौन फिर तुझको बरेगा
        
                                                    
                            

कौन फिर तुझको बरेगा
तू न जब उस पथ मरेगा?

निखिल के शर शत्रु हनकर,
क्षत भले कर क्षत्र बनकर,
तू चला जबतक न तनकर,--
धर्म का ध्वज कर न लेगा।

देश के अवशेष के रण
शमन के प्रहरण दिया तन
तो हुआ तू शरणशारण,
विश्व तेरे यश भरेगा।

मिलेंगे जन अशंकित मन
खिलेंगे निश्शेष-चेतन,
विषद-वासों के विभूषण,
चरण के तल, तू तरेगा।

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6 महीने पहले
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