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आज का शब्द: इतर और नागार्जुन की कविता- मृतक में भी डाल देगी जान

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  इतर का अर्थ है- अन्य, दूसरा, तुच्छ या छोटा। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- इतर। प्रस्तुत है नागार्जुन की कविता: वह दंतुरित मुस्कान

तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान 
मृतक में भी डाल देगी जान 
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात... 
छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात 
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण, 
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण 
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल 
बाँस था कि बबूल? 
तुम मुझे पाए नहीं पहचान? 
देखते ही रहोगे अनिमेष! 
थक गए हो? 
आँख लूँ मैं फेर? 
क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार? 
यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनी होती आज 
मैं न सकता देख 
मैं न पाता जान 
तुम्हारी यह दंतुरित मुस्कान 
धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य! 
चिर प्रवासी मैं इतर, मैं अन्य! 
इन अतिथि से प्रिय तुम्हारा क्या रहा संपर्क 
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उँगलियाँ माँ की कराती रही हैं मधुपर्क 
देखते तुम इधर कनखी मार 
और होतीं जब कि आँखें चार 
तब तुम्हारी दंतुरित मुस्कान 
मुझे लगती बड़ी ही छविमान 
3 वर्ष पहले
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