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आज का शब्द- गवाक्ष और सुमित्रानंदन पंत की कविता: हाय, हिमालय ही पल में हो गया तिरोहित 

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                                                  'गवाक्ष' का अर्थ होता है- छोटी खिड़की या दीवार में बना हुआ झरोखा। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गवाक्ष। प्रस्तुत है सुमित्रानंदन पंत की कविता: हाय, हिमालय ही पल में हो गया तिरोहित

हाय, हिमालय ही पल में हो गया तिरोहित
ज्योतिर्मय जल से जन धरणी को कर प्लावित!
हाँ, हिमाद्रि ही तो उठ गया धरा से निश्चित
रजत वाष्प सा अंतर्नभ में हो अंतर्हित !
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आत्मा का वह शिखर, चेतना में लय क्षण में,
व्याप्त हो गया सूक्ष्म चाँदनी सा जन मन में !
मानवता का मेरु, रजत किरणों से मंडित,
अभी अभी चलता था जो जग को कर विस्मित
लुप्त हो गया : लोक चेतना के क्षत पट पर,
अपनी स्वर्गिक स्मृति की शाश्वत छाप छोड़कर !

आओ, उसकी अक्षय स्मृति को नींव बनाएँ,
उस पर संस्कृति का लोकोत्तर भवन उठाएँ !
स्वर्ण शुभ्र धर सत्य कलश स्वर्गोच्च शिखर पर
विश्व प्रेम में खोल अहिंसा के #गवाक्ष वर!
5 वर्ष पहले
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