'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अलबेला, जिसका अर्थ है- बाँका, अनोखा, सुंदर, अल्हड़, मनमौजी। प्रस्तुत है हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला से चुनिंदा अंश
बड़े बड़े परिवार मिटें यों, एक न हो रोने वाला,
हो जाएं सुनसान महल वे, जहां थिरकतीं सुरबाला,
राज्य उलट जाएं, भूपों की भाग्य सुलक्ष्मी सो जाए,
जमे रहेंगे पीने वाले, जगा करेगी मधुशाला।।
सब मिट जाएं, बना रहेगा सुन्दर साकी, यम काला,
सूखें सब रस, बने रहेंगे, किन्तु, हलाहल औ' हाला,
धूमधाम औ' चहल पहल के स्थान सभी सुनसान बनें,
जगा करेगा अविरत मरघट, जगा करेगी मधुशाला।।
बुरा सदा कहलायेगा जग में बाँका, चंचल प्याला,
छैल छबीला, रसिया साकी, अलबेला पीनेवाला,
पटे कहाँ से, मधुशाला औ' जग की जोड़ी ठीक नहीं,
जग जर्जर प्रतिदन, प्रतिक्षण, पर नित्य नवेली मधुशाला।।
बिना पिये जो मधुशाला को बुरा कहे, वह मतवाला,
पी लेने पर तो उसके मुँह पर पड़ जाएगा ताला,
दास द्रोहियों दोनों में है जीत सुरा की, प्याले की,
विश्वविजयिनी बनकर जग में आई मेरी मधुशाला।।
हरा भरा रहता मदिरालय, जग पर पड़ जाए पाला,
वहां मुहर्रम का तम छाए, यहां होलिका की ज्वाला,
स्वर्ग लोक से सीधी उतरी वसुधा पर, दुख क्या जाने,
पढ़े मर्सिया दुनिया सारी, ईद मनाती मधुशाला।।
एक बरस में, एक बार ही जगती होली की ज्वाला,
एक बार ही लगती बाज़ी, जलती दीपों की माला,
दुनिया वालों, किन्तु, किसी दिन आ मदिरालय में देखो,
दिन को होली, रात दिवाली, रोज़ मनाती मधुशाला।।
नहीं जानता कौन, मनुज आया बनकर पीने वाला,
कौन अपिरिचत उस साकी से, जिसने दूध पिला पाला,
जीवन पाकर मानव पीकर मस्त रहे, इस कारण ही,
जग में आकर सबसे पहले पाई उसने मधुशाला।।
बनी रहें अंगूर लताएं जिनसे मिलती है हाला,
बनी रहे वह मिट्टी जिससे बनता है मधु का प्याला,
बनी रहे वह मदिर पिपासा तृप्त न जो होना जाने,
बनें रहें ये पीने वाले, बनी रहे यह मधुशाला।।
2 वर्ष पहले