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असम की बाढ़

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            असम बाढ़ पीड़ितों को समर्पित कविता
        
                                                    
                            

जूझ रहा है असम बाढ़ से,
ऐ बलबीरों कुछ मदद करो।
संकट की बिकट परिस्थिति में,
सब साथ रहो कुछ जतन करो।।

सब बंधु बांधव हैं अपने,
सब भारत माँ के बेटे हैं।
ग़र भाई एक बिछुड़ जाए ,
तो सारे भाई रोते हैं।।

हममें कोई गुजराती है,
और कोई आसामी है।
कोई बुंदेलखंड में रहता है,
पर सारे हिन्दुस्तानी हैं।।

यह कर्म क्षेत्र संग्राम सखे,
कुदरत ने कहर यूँ ढाया है।
न जाने कितने मासूमों का,
घर बार इसी में समाया है।।

हो गए अनाथ कुछ बच्चे,
कुछ मात पिता निसन्तान हुए।
दरिया ने कितने बेटों को,
उनकी माँओं से छीन लिए।।

है कठिन परीक्षा की ये घड़ी,
इससे बचकर दिखलाना है।
अपने #आसामी बन्धुओं को,
कुछ मदद हमें भिजवाना है।।

क्षतिपूर्ति नही कर सकते हैं,
पर कुछ तो कर्तव्य हमारा है।
हम मदद करें जो हो सके,
यह ही दायित्व हमारा है।।

सुख आता है दुःख जाता है,
दुःख आता है सुख जाता है।
जब दुःख की रजनी कट जाती है,
तब सुख का नया सबेरा आता है।।

Phone Pe, Bhim , Paytm,
CM राहत कोष में दान करें।
50 -100 जितना हो सके,
दान करने का अवाहन करें।।

एक एक रुपये भी यदि,
हम सवा सौ करोड़ जुटाएंगे।
बाढ़ सदृश त्रासदी से भी,
तुरत निज़ात पाएंगे।।

#जय_हिंद जयभारत
ThakurRSRajpoot

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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4 वर्ष पहले
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