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कोयल की सुरीली तान

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                            कोयल की सुरीली तान
        
                                                    
                            

अाज सुबह खुली है अॉंख
कोयल की सुरीली तान से
मधुर मधुर आवाज़
जैसे मिश्री घुल कर
चली गई हो कानों में
क्या गला पाया है
न कहीं ख़राश
न कहीं अवरोध
तान छेड़ती है तो
शास्त्रीय उस्तादों की
आती है याद
क्या सजाया है
सृष्टि ने कंठ
लयबद्ध सुरबद्ध
न कोई अभ्यास
न कोई रियाज़
बस गूँज जाती है
जादुई आवाज़
सम्मोहन की अवस्था में
ऐसा लगता है
करूँ पीछा उस आवाज़ की
पर लगता है नहीं
दूर से ही सुनूँ
उठाऊँ आनन्द
उस करिश्माई आवाज़ की
और बना लूँ ज़िन्दगी अपनी
संगीतमय सुरमय


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7 वर्ष पहले
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