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कुरंगम

Manoj Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मानव भी है, कुरंगम
        
                                                    
                            
स्वयं में रख सारे सौरभ
ढूंढता उसे मंदिर-मस्जिद
बसता ईश्वर उसके हृदय में
संज्ञान है, मनुष्य को सारा
फिर भी फिरता वह मारा-मारा
ईश्वर से मिला सब कुछ,
पर संतोष प्रकृति सा कहां
अति लालसा में भटकता मानव
हर चौखट, हर द्वार
मानव का यही है, प्राकृतिक श्रृंगार।
3 वर्ष पहले
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