AI, AI, AI सबकी जुबान पर एक ही नाम है
लगता है घर में आया कोई मेहमान है।
मेहमान नहीं है भाई
इसने तो अपनी एक दुनिया है बनाई
जिसको भी लगता है मुसीबत आई
तुरंत ए. आई की टेक्नीक अपनाई
पर लगता है भाई
AI की दुनिया में सब नकली है
कक्षा में पढ़ाने जाएगी को टीचर भी टकली है।
इसमें हँसाने की भी है कला
हो अगर दुखी तो सुनाता है चुटकुला
जब से AI की लहर है आई
इंसान के दिमाग की बत्ती बुझाई
कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर
पर जब दिमाग ही नहीं रहेगा तो काहे का घर
चलो अब घर पर आते हैं,
मम्मी से खाना बनवाते हैं
मम्मी ने तो खाना बनाया
अब कुछ AI से बनवाते हैं
ओहो ये क्या हुआ यहाँ तो सिर्फ रेसिपी मिली
AI के चक्कर में भूखे ही सो जाते हैं।
AI की महिमा है अपरंपार
अब यही कर रहा मानव का बेड़ा पार
शीघ्र अतिशीघ्र करके काम
मानव स्मार्ट बना इतराता है।
पर इतनी सी बात को समझ नहीं पाता है।
कर रहा खुद अपने ही हाथों अपना बंटा धार है।
देखो यारों ये दोस्ती बहुत ही सस्ती है
पर इसकी अलग ही मस्ती है
AI अब दोस्तों से दोस्ती छुड़वाएगा
फिर मानव सिर धुन कर पछताएगा।