मैं भारत हूँ
मैं भारत हूँ....
मैं वेदों और देव कथाओं में मिलता हूँ
मैं ऋषि मुनि की गाथाओं में मिलता हूँ
मैं रामायण हूँ, मैं महाभारत हूँ
मैं अमर हूँ, मैं अनवरत हूँ
मैं भारत हूँ....
जहां सत्य सनातन संस्कार है
जहां मानव धर्म ही स्वीकार है
जहां मज़हब पंथ अनेकों मिलते
जहां बोली भाषा की भरमार है
जहां रूप अनेक है, रंग अनेक है
जहां राष्ट्र धर्म में सब एक है
मैं राष्ट्र भी हूँ मैं धर्म भी हूँ
मैं भाग्य विधाता मैं सर्ब धर्म हूँ
मैं आस्था और इबादत हूँ....
मैं भारत हूँ.......
मैं पावन मिट्टी का हर कण हूँ
मैं समय में लिपटा हर क्षण हूँ
मैं सतयुग का सत्य हरिश्चंद्र
मैं त्रेता का श्रीराम चन्द्र
मैं द्वापर का कृष्ण द्वारिकाधीश
मैं कलियुग का शंकराचार्य पीठ
मैं गुरुनानक की बानी हूँ
मैं गुरु गोविंद सिंह की कहानी हूँ
मैं उपदेश विवेकानंद भी हूँ
मैं बंकिम का आनंद भी हूँ
मैं गांधी का पूर्ण स्वराज भी हूँ
मैं भगत और सुभाष भी हूँ
मैं रक्त का एक एक क़तरा हूँ
जब आज़ादी में बिखरा हूँ
मैं मातृभूमि पर न्यौछावर की आदत हूँ....
मैं भारत हूँ....
मैं उत्तर से दक्षिण तक हूँ
मैं पूरब से पश्चिम तक हूँ
मैं शहर भी हूँ मैं गाँव भी हूँ
मैं धूप भी हूँ मैं छाँव भी हूँ
मैं दिल्ली बैंगलोर, मुंबई भी हूँ
मैं कोलकाता चेन्नई भी हूँ
मैं गाँव का मासूम किसान भी हूँ
मैं खेत भी हूँ और मैं खलिहान भी हूँ
मैं अन्न का एक एक दाना हूँ
मैं भूखे पेट का खाना हूँ
मैं मेहनतकश इंसान भी हूँ
धरती माँ का स्वाभिमान भी हूँ
मैं नीव भी हूँ, निर्माण भी हूँ
मैं हर पत्थर, ईंट भी हूँ
मैं लिखता नयी इबारत हूँ
मैं शहर की ऊंची इमारत हूँ....
मैं भारत हूँ......
मैं अबिरल गंगाजल भी हूँ
मैं आज भी हूँ मैं कल भी हूँ
मैं पतिब्रत सीता अनुसूइया हूँ
मैं मातृत्व में यशोदा मैया हूँ
मैं दुर्गा भी हूँ मैं काली भी हूँ
मैं लक्ष्मीबाई सी बलशाली भी हूँ
मैं प्रतिज्ञा सावित्री सती का हूँ
मैं ज़ौहर पद्मावती का हूँ
मैं वीरांगना रानी वेलु नचियार
मैं सावित्री फुले का मृदुल प्यार
मैं होल्कर अहिल्या बाई हूँ
काशी विश्वनाथ को बसाई हूँ
मैं स्त्री शक्ति से महा शक्ति
जहां कन्या पूजन महा भक्ति
मैं माँ की ममता, बहन की राखी
मैं पत्नी प्रेम की निस्छल झांकी
मैं आधी आबादी, सिर्फ इज्जत नहीं जरूरत हूँ.....
मैं भारत हूँ.....
मैं विश्व शांति सिखलाता हूँ
मैं प्रेम का मार्ग दिखलाता हूँ
मैं अहिंसा परमों धर्मह रूप
मैं महावीर सा परम स्वरूप
मैं युद्ध नहीं मैं बुद्ध चाहता
मैं ज्ञान ध्यान विशुद्ध चाहता
मैं संविधान सबका विधान
मैं लोकतन्त्र सबसे महान
मैं हर व्यक्ति की अभिव्यक्ति
मैं हर व्यक्ति की राष्ट्रभक्ति
मैं ना कभी झुका था ना झुकूँगा
मैं भारत था, भारत हूँ और भारत रहूँगा
मैं आदि हूँ मैं अनंत हूँ....
मैं भारत हूँ......
Bharat Pandey