विज्ञापन

कभी आकर पेड़ तले बैठूँ

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ पंछियों को सुनने का जो जी चाहे,
        
                                                    
                            
कभी जो छाँव मुझे बुलाएं,
जब गीत पत्तों के सुनने का मन करे,
कोई कोयल अपना प्यारा संगीत कहे,
जब बाजार से थक जाऊं कभी,
सारी शुभकामनाएं बांध कभी आऊं में,
पेड़ तले सो जाऊं में,
बीनकर कुछ पत्तों की सूखी डाल,
सुन सकूं उनके यौवन का हाल,
नभ का हो जब रक्तिम भाल,
कभी सांझ ढले कभी उषाकाल,
बिना कुछ मांगे ही छांव मिले,
पेड़ भरा फिर गाँव मिले,
जब हो कभी फूलों की सौगात,
उनसे जो पाएं ढेरों बात,
कुछ पत्ते मुंह पर आकर सोए,
उनकी यादों में बादल रोये,
कुछ ऐसी बरसात का मौसम आए,
रिमझिम रिमझिम भादो आए,
कभी आकर पेड़ तले बैठूँ,
कुछ सुहाने पेड़ हरे देखूँ,
ये बादल राग सुनाई दे,
पंछी फिर से दिखाई दे,
लौटा दो मुझको गांव वही,
पेड़ो से मिलता छांव कहीं,
4 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Junaid Ahmad

5 कविताएं

View Profile

Prasoon Saxena

966 कविताएं

View Profile