ऐ ताजमहल ऐ ताजमल !
तुम्हे तेरी खूबसूरती पर
ऐतराज़ तो नहीं
कट गए हजारों हाथ
तुम्हे बनाने के बाद
अब कौन करेगा
तेरी मरम्मत तेरा टूट
जाने के बाद
कैसे चमकोगे तुम चांद
के साथ
तेरे बनाने जरिया कहीं
मुमताज़ तो नहीं
अब तुझे तराशने वाले
वो हजारों हाथ भी नहीं
अब तेरे चमक में
पहले जैसी बात नहीं
तेरी जगमगाहट तले
अब वो पूनम की रात नहीं
अब किसकी याद में बनोगे
अब शाहजहां की याद में
वो मुमताज़ नहीं
बरसती थी जो चांद की रौंशनी
तुझ पर मगर अब वो बरसात नहीं
कैसे बनोगे तुम तुम्हे बनाने वाले अब
वो हजारों हाथ नहीं
ऐ ताजमहल ऐ ताजमल !
तुम्हे तेरी खूबसूरती पर
ऐतराज़ तो नहीं
आती थी तारे भी तेरे दर पे
अब तेरे दर पे सितारों की बारात नहीं
ऐ ताजमहल ऐ ताजमल !
तुम्हे तेरी खूबसूरती पर
ऐतराज़ तो नहीं......
- अन्वित कुमार उर्फ सोनू निगम