विज्ञापन

नदी के रास्ते

Anonymous User

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जानकर, भूलवश,
        
                                                    
                            
सस्ते में आ गए
सूखी नदी के,
रस्ते में आ गए
ढहने लगे आशियाने,
बहने लगे शामियाने
नदियाँ जागीं तो,
सदमे में आ गए
पहले जो रहते थे,
जिस भी इमारत में
आशियाना छूटा तो,
रस्ते पे आ गए।
8 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Yunush khan

8144 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

650 कविताएं

View Profile