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गहिहैं हरि के शरणमा

Amrita Roy

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पग-पग मिले मोहे नेमी धर्मी प्रातः करे पुजनमा
        
                                                    
                            
मन के मैल को धोवत नाही करिहै लाख जतनमा
आसन लगाइके बनिहैं जोगी मन में भरे गुमनमा
क्षण-क्षण बाँधे पाप गठरिया जग भरि रहे भरममा
बेद पुरान है पढ़ि-पढ़ि बैठे बिसरि गयो है गियनमा
ज्ञान बघारत फिरत जगत में पड़े पाखण्ड करममा
लूक लगाई के घर में अपनो करिहहिं छार चयनमा
जम के फांस से बंधिहहिं सारे
बचिहैं कौन करनमा
कहत अमरिता मुक्ति उपाय
गहिहैं हरि के शरणमा

Amrita Roy
2 वर्ष पहले
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