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बॉलीवुड के 5 सबसे बोल्ड नगमें, जिनकी मादकता हमेशा रहेगी बरकरार 

काव्य डेस्क

Mere Azeez Filmi Nagme
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                                                  हिंदी फिल्मों में समाज को संपूर्ण बनाने की सारी विधा मौजूद है। नायक की खुद्दारी हो या नायिका का त्याग या फिर आपसी प्रेम भाव का आचार-विचार हो या समाज को एकजुट रखने का संदेश, यह सभी चीजें हिंदी फिल्मों में दिखाई जाती हैं। नायक और नायिकाओं के बीच प्रेम और आकर्षण की छटा भी यहां बिखरी हुई है। नायक और नायिकाओं के आलंबन पर आधारित कुछ गीत भी अपनी मोहक अदा के साथ यहां जादू ‌‌बिखेर रहे हैं। यह गीत बोल्ड जरूर है पर इनकी मादकता इनके फिल्मांकन की वजह से हमेशा लोगों के दिलों में बरकरार रहेगी। यहां हम ऐसे ही 5 सबसे मादक गीतों के बारे में आपको बताएंगे। 

1987 में प्रदर्शित 'मिस्टर इंडिया' में श्रीदेवी और अनिल कपूर पर फिल्माया गीत काटे नहीं कटते दिन ये रात...इश्क और हुस्न की इंतहा को जगजाहिर करता है। प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने इस गीत को लिखा है।  किशोर  कमार और आलीशा चिनाय की आवाज ने इस गीत को मधुरतम बनाया है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने इसमें कर्णप्रिय संगीत दिया है। इस गीत में लंबे इंतजार के बाद इश्क के इजहार को बताया गया है। गीत बताता है कि अगर इश्क असरदार हो तो उसका इजहार भी गहरा होता है। गीत आईलवयू के भाव से  शुरू होता है। और इसी भाव के सा‌थ खत्म भी होता है।    

I love you.. 
काटे नहीं कटते ये दिन ये रात कहनी थी तुमसे जो दिल की बात 
काटे नहीं कटते ये दिन ये रात कहनी थी तुमसे जो दिल की बात 
लो आज मैं कहता हूं 
I love you.. I love you.. I love you.. I love you.. 
कोई नहीं है बस तुम हो साथ कहनी थी तुमसे जो दिल की बात 
कोई नहीं है बस तुम हो साथ कहनी थी तुमसे जो दिल की बात 
लो आज मैं कहती हूँ 
I love you.. I love you.. I love you.. I love you.. 
कैसी हवा है, धुली धुली आज फ़िज़ा है, खुली खुली 
कैसी हवा है, धुली धुली आज फ़िज़ा है, खुली खुली 
सारा नज़ारा, नया नया दिल ने पुकारा, पिया पिया 
सारा नज़ारा, नया नया दिल ने पुकारा, पिया पिया 
पिया पिया पिया पिया पिया पिया.. 
तुमने जो ली अंगड़ाई है फिर बात वही याद आई है 
तुमने जो ली अंगड़ाई है फिर बात वही याद आई है 
लो आज मैं कहता हूं
I love you.. I love you.. I love you.. 
I love you.. I love you.. I love you.. 
महका महका, तेरा बदन बहका बहका, मेरा ये मन 
महका महका, तेरा बदन बहका बहका, मेरा ये मन 
छलका छलका, रूप तेरा हल्का हल्का, 
नशा मेरा छलका छलका, रूप तेरा हल्का हल्का, 
नशा मेरा नशा मेरा नशा मेरा नशा मेरा.. 
जब आ ही गई मैं पास तेरे कह दूं जो दिल में है मेरे 
जब आ ही गई मैं पास तेरे कह दूं जो दिल में है मेरे 
लो आज मैं कहती हूं 
I love you.. I love you.. I love you.. 
I love you.. I love you.. I love you.. 
काटे नहीं कटते ये दिन ये रात कहनी थी तुमसे जो दिल की बात 
कोई नहीं है बस तुम हो साथ कहनी थी तुमसे जो दिल की बात 
लो आज मैं कहता हूं 
I love you.. I love you.. I love you.. I love you..
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धक-धक करने लगा, हो मोरा जीयरा डरने लगा...

हिंदी फिल्मों में श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित के दो सुनहरे दौर ‌थे। श्रीदेवी ने मिस्टर इंडिया में अपनी मादकता बिखेरी तो माधुरी दीक्षित ने 1991 में आई फिल्म बेटा में अपना बोल्ड अवतार पेश किया। धक धक करने लगा गीत इस अवतार की बानगी था। इस गीत में माधुरी दीक्षित ने अपने हुस्न की मादक छवि बॉलीवुड में बड़े ही जोरदार ढंग से पेश की। हुस्न से ज्यादा खतरनाक होती है हुस्न की अदा। यह गीत शायद यही कह रहा है। उदित नारायण और अनुराधा पौंडवाल ने इस गीत को गाया है। अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित पर फिल्माए इस गीत को समीर ने लिखा तथा संगीत से आनंद-मिलिंद ने सजाया है। 

(धक-धक करने लगा, हो मोरा जीयरा डरने लगा
    सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ न)    -2

उ: (दिल से दिल मिल गया, मुझसे कैसी ये हया
    तू है मेरी दिलरुबा, क्या लगती है, वाह रे वाह) -2

अ: अपना बनाया पीया तूने मुझे, मैं मीठे-मीठे सपने सजाने लगी
उ: देखा मेरी रानी जब मैंने तुझे, मेरी सोई-सोई धड़कन गाने लगी
अ: जादू तेरा छाने लगा, मेरी नस-नस में समाने लगा
उ: ख़ुद को मैं भुलाने लगा, तुझे साँसों में बसाने लगा
अ: रिश्ता, अब ये रिश्ता, साथी टूटेगा न तोड़े कभी
उ: दिल से दिल मिल गया ...

उ: उलझी है काली-काली लट तेरी, ज़रा इन ज़ुल्फ़ों को सुलझाने तो दे
अ: इतनी भी क्या है जलदी तुझे, घड़ी अपने मिलन की तू आने तो दे
उ: ऐसे न बहाने बना, मेरी रानी, अब तो बाहों में आ
अ: ऐसे न निगाहें मिला, कोई देखेगा तो सोचेगा क्या?
उ: मस्ती छाई है मस्ती, आके लग जा गले से अभी

अ: धक-धक करने लगा ...
उ: दिल से दिल मिल गया ...

टिप टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगाई...

इन दो गीतों के बाद एक तीसरे गीत ने भी 90 के दशक में लोगों को रोमांचित किया था। यह गीत 1994 में प्रदर्शित फिल्म मोहरा का था। इसमें रवीना टंडन और अक्षय कुमार ने पानी में आग लगा दी है। हुस्न की अदा बारिश के मौसम में इस गीत में काफी सुहावनी बन पड़ी है। गीत-संगीत और रवीना टंडन के बेजोड़ नृत्य ने गीत को मधुर अंदाज दिया है। आनंद बक्षी के लिखे इस गीत में वीजू शाह ने संगीत दिया था। उदित नारायण और अलका याज्ञनिक ने इसमें अपनी सुमधुर आवाज दी है। गीत काफी मनोहारी बन पड़ा है। 
 

टिप-टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगाई
आग लगी दिल में तो, दिल को तेरी याद आई
तेरी याद आई तो, जल उठा मेरा भीगा बदन,
मेरे बस में नहीं मेरा मन, मैं क्या करूं

नाम तेरा मेरे लबों पे आया था
तू ने बहाने से मुझे बुलाया था
झूम कर आ गया सावन, मैं क्या करूं

डूबा दरिया में खड़ा मैं साहिल पर
तू बिजली बनकर गिरी मेरे दिल पर
चली ऐसी पागल पवन, मैं क्या करूं

टिप-टिप बरसा पानी, पानी ने आग लगाई
आग लगी दिल में तो, दिल को तेरी याद आई
तेरी याद आई तो, जल उठा मेरा भीगा बदन,
मेरे बस में नहीं मेरा मन, मैं क्या करूं

आज रपट जाएं तो हमें न उठईयो...

इन तीन गीतों ने तो 90 के दशक में धूम मचाई लेकिन 80 के दशक में भी दो ऐसे गीत बने जो हुस्न की अदा और इश्क के करिश्माई अंदाज को अपने में समेटे हुए हैं। इसमें से एक गीत है फिल्म नमक हलाल का आज रपट जाएं तो हमें न उठईयो...अमिताभ बच्चन ने इस गीत में हमेशा की तरह अपनी मोहक छवि बिखेरी है। बारिश में अभिनेत्री स्मिता पाटिल के साथ अमिताभ की जोड़ी आज भी मन को मस्ती से भर देती है। अमिताभ का नृत्य, अभिनय, गीत, संगीत सब कुछ इस गीत में सटीक है। किशोर कुमार और आशा भोंसले की आवाज ने गीत में समां बांध ‌दिया है। बप्पी लाहिरी ने संगीत दिया है। यह गीत आज भी अमिताभ के प्रशंसकों को अच्छा लगता है। 


कि:    अरे अरे अरे न न न न न न
    आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो
    आज फिसल जायें तो हमें ना उठइयो
    हमें जो उठइयो तो
    हमें जो उठइयो तो ख़ुद भी रपट जइयो
    हाँ ख़ुद भी फिसल जइयो
    आज रपट
    आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

    ( बरसात में थी कहां कभी बात ऐसी
    पहली बार बरसी बरसात ऐसी ) -2
आ:    कैसी ये हवा चली
कि:    हा
आ:    पानी में आग लगी
कि:    हा
आ:    जाने क्या प्यास जगी रे
कि:    भीगा ये तेरा बदन
आ:    हा
कि:    जगाये मीठी चुबन रे
आ:    हा
कि:    नशे में झूमें ये मन रे
आ:    कहाँ हूँ मैं मुझे भी ये होश नहीं रे
कि:    आ हा ओ हो -2
    आज बहक जायें तो होश न दिलइयो -2
    होश जो दिलइयो तो ख़ुद भी बहक जइयो
    आज रपट
    आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

आ:    ( बादल में बिजली बार-बार चमके
    दिल में मेरे आज पहली बार चमके ) -2
कि:    हसीना डरी-डरी
आ:    हा
कि:    बांहों में सिपट गई
आ:    हा
कि:    सीने से लिपट गई रे
आ:    तुझे तो आया मज़ा
कि:    हा
आ:    तुझे तो सूझी हंसी
कि:    हा
आ:    मेरी तो जान फंसी रे
कि:    जान-ए-जिगर किधर चली नज़र चुरा के
    आ हा ओ हो -2
आ:    बात उलझ जाये तो आज न सुलझइयो -2
    बात जो सुलझइयो तो ख़ुद भी उलझ जइयो
कि:    आज रपट
    आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो

कि:    बादल से छम-छम शराब बरसे
आ:    सांवरी घटा से शबाब बरसे
कि:    बादल से छम-छम शराब बरसे
आ:    हो सांवरी घटा से शबाब बरसे
कि:    बूंदों की बजी पायल
आ:    हा
कि:    घटा ने छेड़ी गज़ल
आ:    हा
कि:    ये रात गई मचल रे
आ:    दिलों के राज़ खुले
कि:    हा
आ:    फ़िज़ां में रंग घुले
कि:    हा
आ:    जवाँ दिल खुल के मिले रे
कि:    होना था जो हुआ वही अब डरना क्या
आ:    आ हा ओ हो -2
    आज डूब जायें तो हमें बचइयो -2
    हमें जो बचइयो तो
    हमें जो बचइयो तो ख़ुद भी डूब जइयो
कि:    आज रपट
    आहा आज रपट जायें तो हमें ना उठइयो
    आज फिसल जायें तो हमें ना उठइयो
आ:    ( आ हा
कि:    ओ हो ) -2

 

हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे मरने वाला कोई...

80 के दशक में एक और गीत देखने और सुनने को मिला जिसमें हुस्न और इश्क का बेजोड़ संगम था।  1980 में प्रदर्शित फिल्म कुर्बानी के इस गीत में बताया गया है कि इश्क के इजहार को हुस्न की अदा मादक बना देती है। इंदीवर के इस गीत को मनहर उधास ने सुरों से सजाया था। कल्याणजी और आनंद जी ने इसमें संगीत दिया ‌था। इस गीत के बोल और संगीत काफी सटीक हैं।   


ओ हो, हो हो
नसीब इंसान का, नसीब इंसान का
नसीब इंसान का चाहत से ही संवारता है
क्या बुरा इस में किसी पर जो कोई मरता है

हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे मरने वाला कोई
मरने वाला कोई ज़िन्दगी चाहता हो जैसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे

रूठ जाओ अगर तुम तो क्या हो
रूठ जाओ अगर तुम तो क्या हो
पल में ऐसे लगे
पल में ऐसे लगे, जिस्म से जान जैसे जुदा हो
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
मरने वाला कोई
मरने वाला कोई ज़िन्दगी चाहता हो जैसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे

रा रा, रु रा रा
ज़रा पूछो तो मेरा इरादा
ज़रा पूछो तो मेरा इरादा
मुझे किस्से है प्यार, मेरा दिल का है कौन शेह्जादा
ज़रा पूछो तो मेरा इरादा
मेरे ख़्वाबों में जो सज रहा है
मेरे ख़्वाबों में जो सज रहा है
वो खुदा तो नहीं, पर ज़माने में सब से जुदा है
मेरे ख़्वाबों में जो सज रहा है

ज़िन्दगी बिन तुम्हारे अधूरी
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे अधूरी
तुमको पालूं अगर
तुमको पालूं अगर, हर कमी मेरी हो जाए पूरी
ज़िन्दगी बिन तुम्हारे अधूरी

ले चलेंगे तुम्हे हम वहां पर
ले चलेंगे तुम्हे हम वहां पर
तन्हाई सनम
तन्हाई सनम शेहनाई बन जाए जहाँ पर
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे
मरने वाला कोई
मरने वाला कोई ज़िन्दगी चाहता हो जैसे
हम तुम्हे चाहते हैं ऐसे…
8 वर्ष पहले
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