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शलभ श्रीराम सिंह की कविता- यह रास्ता परेशानी का है

काव्य डेस्क

Kavita
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                            यह रास्ता परेशानी का है
        
                                                    
                            
इसी पर चला जाए पहले।

यह रास्ता सुख का है
बच्चों से कहो इस पर आगे बढ़े।

यह रास्ता कुनकुनी धूप और
ताज़ा हवाओं का है
औरतों को इस रास्ते से गुज़ारा जाए
बे-झिझक।

यह रास्ता नए सपनों और नई मंज़िलों का है
पूरी क़ौम को उतारा जाए इस पर।

यह रास्ता भविष्य का है
मुनासिब हर तरह से, समूची मानव जाति के लिए
इस पर हम सबको साथ-साथ चलना है।

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