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Hindi Kavita: राकेशधर द्विवेदी की कविता- याद आता है

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  हाथों से बाल खींचकर तुम्हें उठाना 
घंटों तुम्हारे साथ खेलना
और थककर सो जाना

याद आता है 
नामी स्कूल की एडमिशन की पंक्ति
में तुम्हारा फॉर्म के लिए घंटों खड़ा रहना 
मेरा व्यक्तित्व परीक्षण में फेल हो जाना 
तुम्हारा व्यक्तित्व परीक्षण होना और 
तुम्हारी ढेरों मिन्नतों के बाद 
स्कूल में मेरा एडमिशन होना

याद आता है 
अनेक परीक्षाओं में मेरा 
अनुत्तीर्ण होना 
रोना और कमरा बंद कर 
सो जाना 
तुम्हारा धीरे से आना 
उठाना, खाना खिलाना 
और पुनः धीरे से निकल जाना
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याद आता है बैंक से लोन लेकर 
मुझे महंगे इंजीनियरिंग कॉलेज में 
एडमिशन दिलाना अपने पुराने स्कूटर 
पर ढेरों किक मारना लेकिन मुझे 
नामी कंपनी का लैपटॉप दिलाना

याद आता है 
मेरा स्वदेश में नौकरी न पाना 
विदेश जाकर नौकरी करना 
मोबाइल पर घंटों तुमसे बात करना 
और तुम्हारी स्मृतियों में खो जाना

याद आता है 
तुम्हारे स्मृति-शेष रहने की खबर सुनना 
तुम्हारी अंतिम यात्रा में 
छुट्टी न मिल पाने के कारण 
शरीक न हो पाना तुम्हें याद कर 
घंटों रोना और सिरहाने 
रखी तकिया का भीग जाना

याद आता है 
घर की एक दीवार पर 
तस्वीर के रूप में तुम्हारा 
टिक जाना मेरा लगातार 
तुम्हें देखना आंसुओं को 
पोंछ देना और ईश्वर से प्रार्थना करना कि 
अगले जन्म में तुम्हें पुनः मेरा पिता बनाना....
2 वर्ष पहले
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