विज्ञापन

Motivational Poetry: श्रीनाथ सिंह की कविता- फूलों से नित हँसना सीखो

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना।
        
                                                    
                            
तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना!

सीख हवा के झोकों से लो, हिलना, जगत हिलाना!
दूध और पानी से सीखो, मिलना और मिलाना!

सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना!
लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना!

वर्षा की बूँदों से सीखो, सबसे प्रेम बढ़ाना!
मेहँदी से सीखो सब ही पर, अपना रंग चढ़ाना!

मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना!
पतझड़ के पेड़ों से सीखो, दुख में धीरज धरना!

पृथ्वी से सीखो प्राणी की सच्ची सेवा करना!
दीपक से सीखो, जितना हो सके अँधेरा हरना!

जलधारा से सीखो, आगे जीवन पथ पर बढ़ना!
और धुएँ से सीखो हरदम ऊँचे ही पर चढ़ना!

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dr Preeti

44 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12479 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile