लक्ष्मी माता दीप पर्व पर सबके घर तुम आना।
जहां बच्चे भूखे सोते है, उनके घर भी जाना।
जो है धनवान, उन्हें अभय का देना तुम वरदान,
और जहां अंधेरा छाया है,
उन खंडहरों का चक्कर आज लगाना।
लक्ष्मी माता दीप पर्व पर सबके घर तुम आना।
कुछ शहरों में पूजा तुम्हारी कंचन कानन से होती है।
कहीं कोई बिटिया छोटी, रोटी के लिए रोती है।
बरसाती तिरपाल बांधकर सड़क किनारे रहने वाले,
उनको अपना भक्त समझ कर उन पर भी कृपा बरसाना।
लक्ष्मी माता दीप पर्व पर सबके घर तुम आना।
उनके घर भी जाना,
जिनके बच्चे दूर जगह पर रहते है।
तीज त्यौहार पर बूढ़े मां बाप,
बच्चों की जुदाई सहते है।
अपना तुम देवत्व छोड़ कर, मानव रूप अपनाना।
उन लोगों की दवा ,दारू, राशन,पानी का हाल जरा ले आना।
लक्ष्मी माता दीप पर्व पर सबके घर तुम आना।
शहरों, गांवों, कस्बों, टीलों, जंगल में भी जाना।
जिनके घर हो, फूस का छप्पर उनके घर भी जाना।
सब दुखियारी लोगों पर अपना प्रेम बरसाना।
जो रोटी का भूखा हो, उसकी भूख जरूर मिटाना।
लक्ष्मी माता दीप पर्व पर सबके घर तुम आना।