हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष, सुप्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार विष्णु खरे का बुधवार 19 सितंबर को दोपहर साढ़े तीन बजे दिल्ली में निधन हो गया। वह 78 वर्ष के थे। उनके निधन से साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। 12 सितंबर को ब्रेन हेमरेज के बाद दिल्ली के जीबी पंत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने करीब एक सप्ताह तक उनकी सघन चिकित्सा की लेकिन वह उन्हें बचा नहीं सके। 11 सितंबर की रात उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था।
हिन्दी अकादमी का उपाध्यक्ष बनने के बाद वह कुछ समय ही पहले मुंबई छोड़कर दिल्ली आए थे। वह दिल्ली में अकेले रह रहे थे। विष्णु खरे को नाइट ऑफ द व्हाइट रोज सम्मान, हिंदी अकादमी साहित्य सम्मान, शिखर सम्मान, रघुवीर सहाय सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 9 फ़रवरी 1940 को जन्मे विष्णु खरे कवि के साथ ही अनुवादक, फिल्म आलोचक, पटकथा लेखक और पत्रकार भी रहे हैं। वे मयूर विहार के हिंदुस्तान अपार्टमेंट में किराए के एक कमरे में अकेले रहते थे।
उन्होंने इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद हिंदी पत्रकारिता से अपने करियर की शुरुआत की। वे कुछ समय तक 'दैनिक इन्दौर' में उप संपादक रहे और बाद में उन्होंने दिल्ली, लखनऊ और जयपुर में नवभारत टाइम्स के संपादक का काम संभाला।विष्णु खरे ने दुनिया के महत्वपूर्ण कवियों की कविताओं के चयन और अनुवाद का विशिष्ट कार्य किया है जिसके ज़रिए समूची दुनिया में प्रतिष्ठित विशिष्ट कवियों की रचनाओं का स्वर और मर्म भारतीय पाठक समूह तक सुलभ हुआ।
8 वर्ष पहले