भारत विविधिता में एकता वाला देश है, देश-विदेश में पलायन ने हिंदी का विस्तार किया है। लेकिन हिंदी के साथ –साथ हमें देश की अन्य आंचलिक भाषाओं को भी साथ लेकर चलना होगा। आंचलिक भाषाओं के बिना हिंदी का उत्थान नहीं होगा, अतः यह हमारा दायित्व बनता है कि देश की तमाम भाषाओं को साथ लेकर चलें। ये बातें सामने आयीं सोमवार शाम एम्बेसडर होटल में रमा थिएटर नाट्य विद्या संस्था (रतनव) द्वारा आयोजित ‘एक शाम हिंदी के नाम’ कार्यक्रम में। दो सत्रों में विभाजित इस कार्यक्रम के पहले सत्र में पुरस्कृत उपन्यास मैकलुस्कीगंज के लेखक विकास कुमार झा प्रमुख वक्ता के रूप में मौजूद थे और उन्होंने अपनी इस बहुचर्चित किताब पर विचार रखे। दूसरा सत्र जो देश के आंचलिक साहित्य पर केन्द्रित था इसमें प्रमुख वक्ताओं ने भोजपुरी, मैथली, अवधी, बुन्देलखंडी, मुलतानी भाषाओं में काव्य पाठ कर शाम को काव्यमयी किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ लेखक डॉ मैत्रेयी पुष्पा ने की, अन्य मेहमानों में वरिष्ठ लेखिका नासिरा शर्मा, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, अलिंद महेश्वरी भी मौजदू रहे। रमा थिएटर नाट्य विद्या संस्था (रतनव) भारत की पारंपरिक वाचिक कला के संरक्षण के लिए एक संस्था है, यह कलाकारों की आजीविका के लिए काम करता है, और थिएटर प्रदर्शन के माध्यम से उनकी कला को बढ़ावा देता है।
रमा पांडेय,रमा थिएटर नाट्यविद्या (रतनव) की सीईओ ने इस अवसर पर कहा “आज का यह कार्यक्रम जिसे हमने नाम दिया है ‘एक शाम हिंदी के नाम’ यह एक मुहिम और सलाम है आंचलिक जीवन और आंचलिक भाषाओं को। वर्तमान में जब मातृभाषा और राष्ट्रभाषा पर बहस छिड़ी है इस दौर में तो यह इस तरह का पहला कार्यक्रम है जिसमें हमने कोशिश की है कि एक भाव और सम्मान पैदा हो देश के अन्य आंचलिक भाषाओं के लिए जो हज़ारों साल पुरानी हैं। हिंदीभाषी होने के बावजूद एक लेखक होने के नाते मैं इस भावात्मक गहराइयों को अच्छी तरह समझती हूँ। हिंदी को अगर सहज करना है तो हिंदी लेखकों को आंचलिक जीवन पर लिखना चाहिए। एक साथ जुड़ाव होगा तो किसी भाषा के साथ कोई टकराव नहीं होगा।
पहले सत्र में उपन्यास मैकलुस्कीगंज के लेखक विकास कुमार झा ने पुस्तक के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह हम सब का दायित्व है कि हम हिंदी के साथ- साथ आंचलिक भाषाओं को भी साथ लेके चलें और इनके बारे में जानें। आंचलिक भाषाओं के बिना हिंदी का उत्थान नहीं होगा तो यह हमारा दायित्व बनता है की देश की तमाम भाषाओं को साथ लेकर चलें।
नासिरा शर्मा ने कहा “विकास कुमार झा रचित मैकलुस्कीगंज उपन्यास दुनिया के एकमात्र एंग्लो इंडियन गावं की एक अद्भुत कथा है। लेखक के पास विषयों की कमी नहीं थी लेकिन उनकी नजर वहां पहुची जो उन्हें विश्व स्तर के उन उपन्यासकारों और फिल्ममेकरों की पंक्ति में लाकर खड़ी करती है जिन्होंने ऐसे विरल विषयों को अपनी लेखनी में चुना” ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही वरिष्ठ लेखिका डॉ मैत्रेयी पुष्पा ने कहा ‘रमा थिएटर नाट्य विद्या (रतनव) द्वारा भारत की पारंपरिक वाचिक कला के संरक्षण के लिए जो इस तरह के कार्यक्रम किये जा रहे हैं यह काबिलेतारीफ है और मैं आभारी हूँ कि मुझे इस तरह की मुहिम का अध्यक्षता करने का अवसर मिला।
4 वर्ष पहले