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Kavya Cafe: विश्व कविता दिवस पर युवा कवियों के साथ एक शाम

काव्य डेस्क

Halchal
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21 मार्च के यूनेस्को संस्था ने विश्व कविता दिवस के लिए चुना, इसका उद्देश्य कविता-विधा के उत्थान के साथ-साथ लोक-काव्य व उनसे जुड़े और उनके माध्यम से होने वाले आंदोलनों को प्रोत्साहन देना है। दुनिया भर के तमाम लोगों के लिए यह दिन किसी उत्सव की तरह है, इसी को उत्साह के साथ मनाने के लिए अमर उजाला काव्य विशेष काव्य-कैफ़े का आयोजन कर रहा है। इसमें शामिल होने वाले कवियों में हैं -  



आदित्य रहबर - आदित्य की कविताएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। कविताओं के साथ शॉर्ट फिल्में भी लिखते हैं। इनकी शॉर्ट फिल्म इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चुनी गई थी। कुछ कविताएं सरकारी विद्यालयों की दीवार पर लिखी गई हैं और जो कविता इन्होंने सफाई कर्मी के सम्मान में लिखी उन्हें भी होर्डिंग पर लगाया गया है। बहरहाल आदित्य दिल्ली में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं।

आशीष द्विवेदी - कवि आशीष द्विवेदी ने 'प्रेम का प्रमेय' नाम से किताब लिखी है। देश की उच्च संस्थाओं में कविता-प्रतियोगिता के निर्णायक की भूमिका में रह चुके हैं। 

अनुराग अनंत - इलाहाबाद के अनुराग ने लखनऊ से पत्रकारिता में पीएचडी की है। दो कहानियों को कहानी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिला। पहली कहानी 'कैस्ट्रेटो' और दूसरी कहानी 'द ब्लू कॉमरेड' थी। एक अन्य मंच पर भी हिंदी की कहानी प्रतियोगिता में 'कुछ नहीं हुआ' को प्रथम पुरस्कार मिला। अब तक 7-8 कहानी प्रकाशित हैं। लंबे अरसे से कविताएँ लिखते रहे हैं। कई ऑनलाइन व प्रिंट प्लेटफॉर्म पर कविताएँ प्रकाशित हैं। 

ऋतुराज कुमार - हिंदी साहित्य, हिंदू महाविद्यालय से स्नातक ऋतुराज 'बगावत के स्वर' पुस्तक के लेखक हैं। टीवी कार्यक्रम में में कॉन्टेंट राइटर हैं। वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के साथ-साथ उर्दू मुशायरों में सक्रिय रहते हैं। ग़ज़ल विधा में लेखन करते हैं। 

विपिन कुमार मिश्र - दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक विपिन की साहित्य में रुचि है। हिंदी गीत, मुक्तक लिखना उन्हें पढ़ना, पुस्तकें पढ़ना पसंद है। कई मंचों पर सक्रिय हैं। 

मयंक असवाल - मयंक पॉडकास्ट करने के साथ- साथ लेखक भी हैं। दिल्ली-एनसीआर में ही लगभग 200 मंचों पर अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।  

सुप्रिया मिश्रा - सुप्रिया किताबों की शौकीन हैं, पढ़ना-लिखना उन्हें पसंद है। कलात्मक स्वतंत्रता की पक्षधर हैं और मानती हैं कि दुनिया को रचनात्मकता की बहुत ज़रूरत है। 
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