भारत दुनिया के सबसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेलों में से एक - बोगोटा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला 2026 (FILBO) के केंद्रीय मंच पर है। यह मेला 21 अप्रैल से 4 मई, 2026 तक कोलंबिया के बोगोटा में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारत 'गेस्ट ऑफ़ ऑनर' यानी विशिष्ट अतिथि देश के रूप में शामिल है। 1988 से आयोजित हो रहा यह मेला 20 से अधिक पवेलियन में पाठकों, लेखकों, प्रकाशकों, संपादकों, अनुवादकों और पुस्तक विक्रेताओं को एक साथ लाता है। इसमें 2,000 से अधिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, लगभग 25 देशों की भागीदारी होती है, और 600,000 से अधिक आगंतुक आते हैं।
पवेलियन का उद्घाटन
भारत पवेलियन का उद्घाटन 21 अप्रैल को कोलंबिया की संस्कृति, कला और ज्ञान मंत्री यानाई कदामानी फोनरोडोना और कोलंबिया तथा इक्वाडोर में भारत के माननीय राजदूत वनलालहमा ने किया। पवेलियन और 'गेस्ट ऑफ ऑनर' देश के रूप में भारत की प्रस्तुति का आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा कोलंबिया स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से किया गया है, जिसमें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत इसकी कार्यान्वयन एजेंसी है।
भारत का 50 सदस्यों वाला एक मज़बूत प्रतिनिधिमंडल इस पुस्तक मेले में हिस्सा ले रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल में लेखक, चित्रकार, कलाकार, प्रकाशक और अधिकारी शामिल हैं, जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे कर रहे हैं। अपने संबोधन में, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में उप सचिव श्रेयांश मोहन ने कहा कि FILBO में भारत की भागीदारी से भारतीय रचनाओं को लैटिन अमेरिका में एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि यह भागीदारी केवल पुस्तकों के आदान-प्रदान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक साझा सांस्कृतिक क्षितिज के निर्माण का भी प्रतीक है।
सुश्री यानाई कदामानी फोनरोडोना ने भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक परंपराओं, विशेष रूप से इसकी भाषाई विविधता के प्रति अपनी प्रशंसा व्यक्त की। कोफोरियास के अध्यक्ष, आंद्रेस लोपेज़ ने 'इंडिया गेस्ट ऑफ़ ऑनर' प्रस्तुति की सराहना की, जिसे बहुत ही बेहतरीन ढंग से तैयार किया गया था; वहीं, कोलंबियन बुक चैंबर के कार्यकारी अध्यक्ष, एमीरो अरिस्टिज़ाबल ने पुस्तकों के विविध संग्रह को प्रदर्शित करने और भारत व कोलंबिया के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में पवेलियन की भूमिका पर प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में कोलंबिया और इक्वाडोर में भारत के माननीय राजदूत ने आगंतुकों को 'इंडिया गेस्ट ऑफ़ ऑनर' प्रस्तुति देखने और भारत की बहुभाषी तथा समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने के लिए आमंत्रित किया। इस समारोह में स्पेनिश भाषा में अनूदित दस पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, और इसमें एना वेलेज़ द्वारा ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति भी शामिल थी।
3,000 वर्ग मीटर के विशाल क्षेत्र में फैला 'भारत पवेलियन' एक ऐसे स्थान के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत, समकालीन विचारों और विविध संस्कृति का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
पैवेलियन के केंद्र में इसका एक अनोखा मास्कोट है, जिसे पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल की 'कालीघाट कला' शैली में बनाया गया है। इसमें एक भारतीय परिवार को एक साथ पढ़ते हुए दिखाया गया है, जो साझा कहानियों का प्रतीक है और एक ऐसे घर जैसे सुरक्षित आश्रय को दर्शाता है, जहाँ कहानियाँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती हैं।
भारत पवेलियन का नारा -"पढ़ें और जानें भारत" - आगंतुकों को 100 से अधिक साहित्यिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पुस्तक प्रदर्शनियों और विशेष ऑडियो-विजुअल शोकेस के माध्यम से भारत के अनेक आयामों को जानने के लिए आमंत्रित करता है। यह पवेलियन एक विनम्र निमंत्रण देता है- "आइए, पढ़ें और जानें भारत" - और हर आगंतुक को भारत को केवल एक स्थान के रूप में ही नहीं, बल्कि कहानियों, विचारों और संस्कृतियों के एक निरंतर विकसित होते अनुभव के रूप में जानने के लिए प्रेरित करता है।
FILBO की थीम 'मौन' का उत्सव मनाती है
बोगोटा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला (FILBO) 2026 का मुख्य विषय "एक-दूसरे को सुनना ही एक-दूसरे को पढ़ना है" है, जो मौन, शांति और चिंतन पर केंद्रित है। इस विषय को भारत पवेलियन में आयोजित सात विशेष प्रदर्शनियों की एक शृंखला में बड़ी ही कुशलता से पिरोया गया है। ये प्रदर्शनियाँ भारत के सभ्यतागत इतिहास और समकालीन जीवन के विविध आयामों को प्रस्तुत करती हैं; इनमें से प्रत्येक प्रदर्शनी को एक ऐसे 'आश्रय स्थल' के रूप में तैयार किया गया है जहाँ ठहराव, गहराई और विस्मय का अनुभव होता है, और जहाँ मन बिना किसी शोर-शराबे के मुक्त होकर विचरण करता है।
भारत पवेलियन की एक प्रमुख विशेषता सात क्यूरेटेड प्रदर्शनियों की एक शृंखला है, जो भारत के सभ्यतागत इतिहास और समकालीन जीवन के विविध आयामों को प्रस्तुत करती है। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की 'थेरीगाथा' से लेकर 19वीं शताब्दी की सावित्रीबाई फुले तक - भारत की इस प्रदर्शनी, 'युगों-युगों की भारतीय महिला विचारक : थेरीगाथा से सावित्रीबाई फुले तक', में भारतीय महिला विचारकों की उस चिरस्थायी विरासत का उत्सव मनाया गया है, जिसमें उन्होंने कविता, दर्शन, निजी दुविधाओं और धार्मिक अन्वेषणों के माध्यम से उल्लेखनीय बौद्धिक योगदान दिया है। उन्होंने न केवल ज्ञान के सृजक के रूप में कार्य किया, बल्कि वे ऐसी अंतर्दृष्टिपूर्ण टीकाकार और साहसी आलोचक भी रहीं, जिन्होंने सामाजिक सीमाओं को चुनौती दी और एक अधिक मानवीय तथा समतावादी विश्व की पुनर्कल्पना की।
रोमेन रोलैंड, जो एक जाने-माने फ्रांसीसी नोबेल पुरस्कार विजेता (1915) थे, ने महात्मा गांधी को 'हम बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, और कलाकारों' का 'गुरु' कहा था। प्रदर्शनी 'गांधी : लेखकों के लेखक' में महात्मा गांधी की एक लेखक, संपादक, प्रकाशक, मुद्रक और संस्था-निर्माता के रूप में भूमिका को दर्शाया गया है। इसमें उनके विशाल और बहुआयामी रचनात्मक कार्यों को भी शामिल किया गया है- जिनमें उनका व्यक्तित्व, कार्य, विचार, लेखन और भाषण शामिल हैं- जिन्होंने न केवल उनके समकालीनों को, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साहित्यकारों के साथ-साथ समाजशास्त्रियों, अर्थशास्त्रियों, राजनीतिशास्त्रियों, वैज्ञानिकों, कलाकारों, संगीतकारों, चित्रकारों और मूर्तिकारों को भी समान रूप से प्रेरित किया।
प्रदर्शनी 'साहित्य : आधुनिक भारत की महान आवाज़ें' भारत के बहुभाषी साहित्यिक परिदृश्य की दिग्गज हस्तियों को प्रदर्शित करती है। यह प्रदर्शनी भारतीय साहित्य की विविधता और वैश्विक साहित्यिक चर्चाओं में इसके योगदान को दर्शाएगी, जिसमें रवींद्रनाथ टैगोर, आशापूर्ण देवी, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, मन्नू भंडारी, सुब्रमण्यम भारती, मिर्ज़ा ग़ालिब और वैकोम मुहम्मद बशीर जैसी महान विभूतियाँ शामिल हैं।
"पठन : भारत की पठन-लेखन विरासत' भारतीय ज्ञान प्रणालियों के विकास को मौखिक परंपराओं से लेकर हस्तलिपियों और मुद्रण संस्कृति तक को दर्शाता है, जबकि प्रकृति: भारत के महान चित्रकार' मारियो मिरांडा और मंजुला पद्मनाभन जैसे प्रख्यात भारतीय कलाकारों के कार्यों को प्रदर्शित करता है, और भारत में बाल साहित्य को आकार देने में उनके चित्रों की भूमिका पर प्रकाश डालता है।
प्रदर्शनी 'भूमि : हिमालय पर एक कोलंबियाई नज़र' में, कोलंबियाई डॉक्यूमेंट्री फ़ोटोग्राफ़र एमिलियो अपारिसियो रोड्रिगेज़ द्वारा पंद्रह वर्षों में हिमालय के ऊँचे इलाकों और विविध सांस्कृतिक क्षेत्रों की खोज को एक प्रभावशाली दृश्य कथा के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
'उभरता भारत' भारत की समकालीन उपलब्धियों को दर्शाता है, क्योंकि भारत में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। यह अंतरिक्ष विज्ञान और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हुए विकास को रेखांकित करता है, जिसमें भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन, चंद्रयान-3 की लैंडिंग, भारत का सबसे लंबा जल-सेतु (ओवरवाटर ब्रिज), भारत में दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा और ऐसे ही कई अन्य मील के पत्थर शामिल हैं।
बातचीत, फ़िल्मों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत को जानें।
साहित्यिक सत्र
भारतीय लेखकों के प्रतिनिधिमंडल में पत्रकार और लेखक अनंत विजय; चित्रकार और लेखिका नीतू शर्मा; उपन्यासकार और पटकथा लेखक कुलप्रीत यादव; लेखक, अनुवादक और सिविल सेवक जितेंद्र कुमार सोनी; बॉलीवुड अभिनेता और लेखक अखिलेंद्र मिश्र; लेखिका मनोरमा मिश्रा; लेखक और राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता; चित्रकार पार्थ सेनगुप्ता; लेखक रामानंद पांडे; कवि स्वर्णजीत सावी; कवयित्री और लेखिका उषा उपाध्याय; भाषाविद् और लेखक भूषण भावे; और लेखक व पूर्व सिविल सेवक शिव प्रसाद, आदि शामिल होंगे। अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायु सेना के लड़ाकू पायलट शुभांशु शुक्ला - जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय हैं- के साथ कई विशेष सत्र आयोजित किए जाएँगे; इन सत्रों में साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ बच्चों के साथ संवाद सत्र भी शामिल होंगे।
कोलंबियाई वक्ताओं में एसोसिएशन एमिगोस डी इंडिया-कोलंबिया के बोर्ड सदस्य एलेक्स सिएरा मोनकाडा शामिल होंगे; शिक्षाविद् एन्ड्रेस बैरागान, प्रमुख कोलंबियाई बुद्धिजीवी, फोटोग्राफर और पत्रकार एन्ड्रेस हर्टाडो गार्सिया; कोलम्बियाई वृत्तचित्र फोटोग्राफर एमिलियो अपारिसियो रोड्रिग्ज; यात्री और शिक्षक फर्नांडो सिल्वा; लेखक और इंडोलोजिस्ट जर्मन पुयाना; फ़िल्म निर्देशक हेरोल्ड ट्रॉमपेटेरो; लेखिका लौरा नतालिया रीना गोमेज़ और पाक विशेषज्ञ रोशेल मिरांडा और कई अन्य शामिल होंगे।
भारत की भागीदारी का एक मुख्य आकर्षण 50 से अधिक भारतीय बाल पुस्तकों का विमोचन होगा, जिनका अंग्रेज़ी से स्पेनिश में अनुवाद किया गया है; यह भारतीय कहानियों को लैटिन-अमेरिकी पाठकों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें 27 द्विभाषी पुस्तक भी शामिल हैं।
25 स्पेनिश अनुवादों की इस सूची में सज्जन सिंह की 'कोवासजीज़ न्यू नोज़', महात्मा गांधी की 'व्हाट इज़ हिंदुइज़म?', कृष्ण कृपलानी की 'टैगोर : ए लाइफ' और 'गांधी : ए लाइफ', मनोज दास की 'माई लिटिल इंडिया', रमेश बिजलानी की 'ए प्राइमर ऑन योगा', शरदिनी दहनुकर और उर्मिला थत्ते की 'आयुर्वेदा अनरिवेल्ड', विकी आर्य की 'अमैज़िंग ऑक्टि', शेरिल राव की 'वन नाइट', और रवींद्रनाथ टैगोर की 'होलिडेज़ हैव कम' आदि रचनाएँ शामिल हैं।
इस द्विभाषी संग्रह में ऐंद्रिला मित्रा की 'ए फ्रेंड फोरएवर', अनूप रे की 'आनंदीज़ रेंबो', रबींद्र नाथ साहू की 'भक्त सलबेगा', प्रचेता गुप्ता की 'फ्रेंड', जगदीश जोशी की 'फु-कुः एन एलियन', सिगरुन श्रीवास्तव की 'आई एम बेटर देन यु', और आशीष सेनगुप्ता की 'लालु एंड द रेड काइट' तथा अन्य रचनाएँ शामिल हैं।
फिल्में और वृत्तचित्र
मंडप आधुनिक भारतीय साहित्य के दिग्गजों और प्रमुख भारतीय फिल्मों जैसे बाहुबली, आरआरआर, सोरारारी पोटरू, क्वीन, मैरी कॉम, कहानी, भाग मिल्खा भाग, दंगल, इंग्लिश विंग्लिश, तनु वेड्स मनु, जब वी मेट और नीरजा पर वृत्तचित्रों की दैनिक स्क्रीनिंग की भी मेजबानी करता है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
ये सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दर्शकों को भारत की शास्त्रीय और लोक परंपराओं का एक गहन अनुभव प्रदान करती हैं। इनमें भरतनाट्यम और कथक नृत्यों की एक शृंखला शामिल है, जिसमें 'दुर्गा वंदना' और 'सरस्वती वंदना' जैसी रचनाएँ प्रस्तुत की जाएँगी। राजस्थान के पारंपरिक लोक नृत्य - जिनमें 'कालबेलिया' और 'चरी' शामिल हैं, तथा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम, जिनमें बाँसुरी, सितार, तबला, संतूर और तानपुरा जैसे विभिन्न भारतीय पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग किया जाएगा, दर्शकों को भारत की प्रदर्शन कलाओं की समृद्ध विरासत से परिचित कराएँगे।
पुस्तक प्रदर्शनी, ऑडियो-विजुअल बूथ और एआई कियोस्क
इस पवेलियन में लगभग 3,000 पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी, जो विभिन्न विधाओं में भारतीय लेखन की समृद्धि और विविधता को दर्शाएंगी; साथ ही, यहाँ भारत की थीम पर आधारित एक रेस्टोरेंट भी होगा, जहाँ देश के विविध व्यंजनों का स्वाद चखा जा सकेगा - यह रेस्टोरेंट लखनऊ शहर से प्रेरित है, जिसे युनेस्को द्वारा 'सिटी ऑफ़ गैस्ट्रोनॉमी' (खान-पान के शहर) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
भारत पवेलियन में बच्चों और युवा पाठकों के लिए एक खास ज़ोन होगा, जिसे एक इंटरैक्टिव और दिलचस्प स्थान के तौर पर डिज़ाइन किया गया है। यहाँ कहानी सुनाने के सत्र, रचनात्मक कार्यशाला और प्रैक्टिकल एक्टिविटीज़ होंगी, जो भारतीय संस्कृति को आसान और मज़ेदार तरीके से पेश करेंगी। इसका एक खास आकर्षण होगा 'इंडिया क्वेस्ट' - 25 क्विज़-आधारित सवालों का एक खास सेट, जो बच्चों को भारत के अलग-अलग पहलुओं- जैसे भूगोल, संस्कृति, इतिहास, साहित्य, त्योहार, खान-पान और आज के जीवन को जानने का मौका देगा। इसके अलावा, इस जगह पर पहेलियाँ और रचनात्मक खेल, युनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की खोज, और भारत के वन्यजीवों, जिनमें राष्ट्रीय पशु और पक्षी शामिल हैं, से दिलचस्प परिचय जैसी गतिविधि भी होंगी।
4 महीने पहले