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सोने से पहले बेटी को सुनाने के लिए कहानियों का दस्तावेज है:  द फादर हू रेन आउट ऑफ स्टोरीज

काव्य डेस्क

Halchal
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                            जब एक पिता के पास बेटी को सुनाने के लिए सोने से पहले की कहानियाँ खत्म हो जाती हैं, तो वह सिनेमा, यात्राओं और प्रेम को एक रोचक, हास्यपूर्ण जासूसी दुनिया में बदल देता है। लेकिन कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है, जब कभी बिस्तर पर लेटकर इन कहानियों को सुनने वाली बच्ची खुद हर मामले की जाँच करने वाली मुख्य जासूस बन जाती है।
        
                                                    
                            

इस पुस्तक के लेखक किरण शिवकुमार भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी हैं—मलयाली, पति और एक जिज्ञासु बच्ची के पिता। इसी बच्ची के लिए उन्होंने सबसे पहले सोने से पहले की कहानियों में डाइनो और राइनो को जीवंत किया। वे वर्तमान में उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिरीक्षक (IGP), लखनऊ रेंज के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और इंटरपोल में भी सेवाएँ दे चुके हैं। उन्होंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, तिरुवनंतपुरम से बी.टेक. और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास से एम.टेक. की शिक्षा प्राप्त की है।

मलयालम सिनेमा, पारिवारिक किस्सों और बार-बार सुनी-सुनाई जाने वाली उन कहानियों के बीच उनका बचपन बीता, जिनमें हर बार कुछ नया जादू जुड़ जाता था। जब रात में सुनाने के लिए सामान्य कहानियाँ खत्म हो गईं, तो उन्होंने अपनी बेटी के लिए हास्य और रोमांच से भरी जासूसी कहानियाँ गढ़नी शुरू कर दीं। एक पिता की यह सहज कल्पना धीरे-धीरे एक ऐसी निजी दुनिया में बदल गई, जिसमें चोरी हुए मुकुट, गायब गुड़ियाएँ, भागती हुई कारें, संग्रहालय के रहस्य, यात्राओं में छिपे सुराग और एक यादगार खलनायक—पॉल बार्बर—शामिल थे।

यह पुस्तक उसी दुनिया को सहेजने की उनकी कोशिश है—सोने से पहले की उन कहानियों की हँसी, घर की अपनी भाषा, उन फिल्मों की यादों को जिन्होंने उनके भीतर की कल्पना को आकार दिया, और उस छोटी-सी बच्ची की स्मृति को, जो धीरे-धीरे इस कहानी की सबसे बेहतरीन जासूस बन गई।
4 घंटे पहले
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