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द फोर पैट्रियट्स: आधुनिकता में राष्ट्रवाद की कहानी

काव्य डेस्क

Book Review
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पुस्तक को पढ़ने के बाद काल्पनिकता का अहसास होता है, लेकिन उस अहसास में वास्तविकता का अंश भी कमतर नहीं होता। यह पुस्तक सच्चाई और कल्पना का अनोखा मिश्रण है।

अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने राष्ट्रपति बनने के बाद अपने प्रथम भाषण में कहा था, ‘अमेरिका वासियों, तुम यह मत सोचो कि अमेरिका तुम्हारे लिए क्या कर रहा है, बल्कि तुम यह सोचो कि तुम अमेरिका के लिए क्या कर रहे हो।’ दरअसल, यह केवल एक वक्तव्य भर नहीं है, बल्कि देशभक्ति की भावना को एक जज्बे के तौर पर दिल में जिंदा करने और उसे जगाए रखने की एक गंभीर नसीहत भी है। क्योंकि अपने देश और मातृभूमि के प्रति सम्मान रखना, स्वाभिमान प्रकट करना और उसके प्रति वफादार रहना ही देशभक्ति की भावना का सूचक है। बहुत कुछ इसी सच से रूबरू कराती है, सुमित अग्रवाल लिखित पुस्तक ‘द फोर पैट्रियट्स’।
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दरअसल, देश की बात तो...

दरअसल, देश की बात तो आज हर कोई करता है, लेकिन आखिर देश है क्या? केवल कागज पर बना हुआ एक मानचित्र या फिर धरती का महज एक टुकड़ा! जी नहीं, देश केवल भूगोल नहीं है और वह केवल सीमा-रेखा के भीतर सिमटा जमीन का टुकड़ा भर भी नहीं है। वह भूमि के उस टुकड़े पर रहने वालों की कर्मभूमि है, जन्मभूमि है, उनकी पालनहार है, मां है, उनकी आत्मा है। सुमित अग्रवाल ने ‘द फोर पैट्रियट्स’ में इसी देशभक्ति को अपनी पुस्तक का विषय बनाया है और स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया है कि जीवन के सहूलियत भरे दिनों में देश के प्रति आस्था का उद्गार करना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन जीवन के मुश्किल भरे दिनों में भी देशहित को सर्वोपरि मानना एवं इस दिशा में सतत प्रयत्नशील रहना कहीं ज्यादा मुश्किल है।
लेकिन, जो ऐसा कर पाने में सफल होते हैं, वही सही मायने में देशभक्त कहलाने के योग्य हैं। ‘द फोर पैट्रियट्स’ में मुख्य रूप से चार किरदार हैं और चारों जीवन-यापन के अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखते हैं। इन किरदारों में से वरुण एक एनआरआई साॅफ्टवेयर इंजीनियर है, तो सलमान काॅफी मोमेंट्स का सीईओ है, राघव आज के माहौल में भी एक निहायत ईमानदार राजनेता है, तो आदित्य एक परोपकारी उद्यमी। जीवनयापन के अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखने के बावजूद, जो एक चीज इन्हें एक प्लेटफाॅर्म पर लाकर न केवल खड़ा करती है, बल्कि उन्हें एक साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, वह है देशभक्ति। 

हालांकि, देशभक्ति की यह भावना...

हालांकि, देशभक्ति की यह भावना इन चारों सुविधाभोगी, लेकिन साधारण मनुष्यों के अंदर यों ही प्रस्फुटित नहीं हुई है, बल्कि जिंदगी ने इनके लिए ऐसी व्यूहरचना की, नसीब ने इनके साथ कुछ ऐसा खेल रचा कि इन्हें अपने आरामदेह जिंदगी को परे झटकते हुए देश को खोखला कर देने के लिए आमादा असाध्य बुरी ताकतों से दो-दो हाथ करने के लिए आगे आना पड़ा। महत्वपूर्ण बात यह है कि अलग-अलग क्षेत्रों से ताल्लुक रखने के बावजूद इन चारों किरदारों का आपस में गहरा दोस्ताना है, एक-दूसरे पर अटूट भरोसा है और ये डरपोक भी कतई नहीं हैं। ये सारे गुण ही इन्हें इनकी मंजिल तक पहुंचाने में मददगार होते हैं।
‘द फोर पैट्रियट्स’ के ये चारों किरदार अतिवादी देशभक्ति से ग्रसित नहीं हैं, बल्कि दुश्मनों की घातकता को भांपने के बाद इनके अंदर देशभक्ति की भावना ज्वार बनकर सामने आई है। इनका मकसद देशभक्ति के बहाने साम्राज्य निर्माण, विस्तार और उसका नियंत्रण कतई नहीं है, बल्कि इससे परे अपनी मातृभूमि को हर षड्यंत्र से बचाकर उसके भविष्य को सुरक्षित हाथों में देखना ही इनका अंतिम लक्ष्य है, जिसके लिए ये हर जोखिम से टक्कर लेने के लिए तैयार हैं और अपना मकसद भी हासिल करते हैं।

दरअसल, समाज के...

दरअसल, समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखने वाले ‘द फोर पैट्रियट्स’ के ये चार युवा किरदार हमारे देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि हैं, जो यह बताते हैं कि देश के भविष्य को संवारना और उसे सुरक्षित रखना केवल राजनेताओं का काम नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की अहम जिम्मेदारी है। आज की राजनीति अगर ठीक नहीं है, तो इसे सुधारने का जिम्मा भी युवाओं की ही है। पुस्तक को पढ़ने के बाद काल्पनिकता का अहसास होता है, लेकिन उस अहसास में वास्तविकता का अंश भी कमतर नहीं होता। यानी, यह पुस्तक सच्चाई और कल्पना का अनोखा मिश्रण है, जिसमें निराशा के साथ आशा का बेजोड़ संतुलन बैठाया गया है। 

किताब- द फोर पैट्रियट्स 
लेखक -  सुमित अग्रवाल
प्रकाशक - रूपा पब्लिकेशन, नई दिल्ली
मूल्य - 250 रुपये


- संजीव कुमार झा

8 वर्ष पहले
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