जब मुशायरों की बात होती है, तो दिल मान लेता है कि बात फुर्सत की ही होगी। लेकिन जब उर्दू की बात होती है, तो अदब से अदब की बात होती है और जब नज्म की बात होती है, तो लगता है कि अल्फाज नहीं, रूह की रूह से बात हो रही है। मशहूर शायर शीन काफ निजाम की फनकारी पर रची इस किताब में डॉ. निसार राही ने एक अनोखी कारीगरी की है, लेकिन कई जगह नज्मों की व्याख्या बेवजह लंबी खिंची हुई महसूस होती है।
किताब- सारा शहर गजल कहता है
संपादन- डॉ. निसार राही
प्रकाशक- सिटिजन्स सोसाइटी फॉर एजूकेशन, जयपुर
मूल्य- 500 रुपये