स्वच्छ और वास्तविक प्रेम इस प्रकार की आधिपत्य आकांक्षा से कुछ संबंध नहीं रखता है। वह 'उस' की प्रसन्नता, उसका सुख, उसके संतोष की ओर सचेष्ट रहता है, उस पर क़ब्ज़ा कर लेना नहीं चाहता।
- जैनेंद्र कुमार
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