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आज़ादी स्पेशल: कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                            देश प्रेम और देश के लिए कुछ कर गुज़रने का जज़्बा हर नागरिक में होता है। हिंदी सिनेमा ने भी इस मोहब्बत और जज़्बे को बख़ूबी अभिव्यक्त किया है। आज भी देशभक्ति के कई ऐसे गाने हैं जो लोकप्रिय हैं। बदलते वक़्त के साथ इनकी लोकप्रियता में इज़ाफ़ा ही हुआ है। कुछ ऐसे बेशक़ीमती गीत  है जो हर नागरिक को वतन के प्रति अपनी मोहब्बत का इज़हार करने के लिए अल्फ़ाज़ देते हैं।आज आज़ादी स्पेशल में पेश है लोकप्रिय देशभक्ति गीत 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों...।'
        
                                                    
                            

1964 में आई हक़ीकत फ़िल्म को लोगों ने काफ़ी पसंद किया था। इसका देशभक्ति से लबरेज़ गीत 'कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों' आज भी लोकप्रिय है। इसके बोल लिखे थे मशहूर गीतकार कैफ़ी आज़मी ने और गाया था मोहम्मद रफ़ी ने। धर्मेंद्र, बलराज साहनी, संजय खान सहित अन्य कलाकारों पर फ़िल्माए गए इस गीत को मदन मोहन ने अपने दिलकश संगीत से सजाया था ।

कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों     

सांस थमती गई नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते मरते रहा बांकापन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज़ आती नहीं
हुस्न और इश्क़ दोनों को रुसवा करे 
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
बाँध लो अपने सर पर कफ़न साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

राह क़ुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नये क़ाफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले
आज धरती बनी है दुल्हन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर
इस तरफ़ आने पाये न रावण कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाये न सीता का दामन कोई
राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों 

यूट्यूब पर मौजूद इस गीत को यहां सुनें -
9 वर्ष पहले
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