जम्मू। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर नौ शिक्षकों को रविवार को राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा गया। श्रीनगर में उपराज्यपाल ने इन शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए पुरस्कृत किया। इनमें पांच शिक्षक जम्मू जबकि चार शिक्षक कश्मीर संभाग से थे।
रविवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभी नौ शिक्षकों को सम्मानित करते हुए उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य की प्रशंसा की। जम्मू संभाग से सम्मानित होने वालों में राजोरी से मोहम्मद अयाज रैना, रोहित गुप्ता, सुभाष चंद्र और रियासी से राकेश कुमार, जम्मू से कुलदीप गुप्ता थे। एलजी ने कहा कि शिक्षा समाज और देश के निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। शिक्षकों का सम्मान न सिर्फ उनका मनोबल बढ़ाता है, बल्कि अन्य को बेहतर करने को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय मदद के साथ बुनियादी ढांचों को बढ़ा रही है। कोरोना के मुश्किल समय में शिक्षकों ने लीग से हटकर काम करते हुए ऑनलाइन मोड से लेकर सामुदायिक कक्षाएं लगाकर बच्चों में शिक्षा की अलख जगाई है। चुनौतीपूर्ण समय में शिक्षा विभाग ने शानदार कार्य किया है। नई शिक्षा नीति देश में शिक्षा क्रांति लाने का काम करेगी और जम्मू-कश्मीर इसमें अपना अहम योगदान देगा।
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प्रदेश की जीडीपी का 47 फीसदी शिक्षा पर होता है खर्च: मुख्य सचिव
मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कई एतिहासिक फैसले ले रही है। प्रदेश में शिक्षा पर अपनी जीडीपी का 47 फीसदी पैसा खर्च करता है, जो देश के कई राज्यों से काफी ज्यादा है। हम एक बच्चें पर एक लाख रुपये खर्च करते है। इसी तरह अगर छात्र-शिक्षक का अनुपात हमारे यहां नौ पर एक शिक्षक है, जबकि देश में यह अनुपात 25 से 30 छात्रों पर एक शिक्षक का है। वहीं अगर आधारभूत संरचना की बात करे तो हमारे पास उसकी की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का पहला प्रदेश बनेगा जो नई शिक्षा नीति को सबसे पहले लागू करेगा। नई शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा काफी काम हो चुका है और शेष कार्य दो से तीन महीने में पूरा किया जाएगा।