जम्मू-कश्मीर में मेडिकल कॉलेजों का विस्तार तो हुआ, लेकिन अभी तक मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं खोली गई। प्रदेश में मौजूदा 1100 से ऊपर एमबीबीएस सीटें हैं। बीएससी नर्सिंग कॉलेज भी चल रहे हैं, लेकिन इन संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए स्वतंत्र तौर पर विश्वविद्यालय नहीं खुला। नतीजतन सीटों के बढ़ने से जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालय पर शैक्षणिक गतिविधियों का लोड लगातार बढ़ रहा है।
पूर्व गठबंधन सरकार के कार्यकाल में चार सदस्यीय समिति का गठन कर एक स्वतंत्र चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना बनाई थी। लेकिन सरकार चले जाने के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई। वर्तमान में प्रदेश में नर्सिंग और पैरा मेडिकल कॉलेजों/स्कूलों के अलावा सभी मेडिकल कॉलेज जम्मू और कश्मीर विवि से संबद्ध हैं। इन संस्थानों की जम्मू और कश्मीर विवि को प्रवेश, परामर्श, परीक्षा का समय पर आचरण, परिणाम और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ये विश्वविद्यालय शैक्षणिक स्तर पर अन्य कॉलेजों को भी देख रहे हैं। जम्मू और कश्मीर में कई नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण किया गया है। इससे पहले जीएमसी जम्मू और श्रीनगर के अलावा सीमित कॉलेज ही चल रहे थे। जीएमसी जम्मू और श्रीनगर में 180-180, जीएमसी डोडा, राजोरी, कठुआ, अनंतनाग, बारामुला और बेमिना मेडिकल कालेज में 100-100 एमबीबीएस सीटें हैं।
यह भी पढ़ें- उपराज्यपाल मनोज सिन्हा बोले: सर्दियों में बिजली बहाली निर्धारित समय पर करें सुनिश्चित, सभी परियोजनाओं की भी हो निगरानी
निजी क्षेत्र में बत्रा अस्पताल जम्मू में 100 एमबीबीएस सीटें हैं। इसके अलावा डेंटल कॉलेज अलग से हैं। जीएमसी जम्मू 1971 से काम कर रहा है और सबसे पुराना है। ऐसी भी मांग की गई थी कि जीएमसी जम्मू को क्लस्टर विश्वविद्यालय बनाकर अन्य कॉलेजों का नियंत्रण अधिकार दिया जाए, लेकिन किसी ने अभी तक मेडिकल विश्वविद्यालय के लिए कदम नहीं बढ़या है।
अलग से मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना होने से मेडिकल संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इसमें सभी कार्य निर्धारित समय में पूरा हो सकेंगे, जिसका लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। इसके साथ जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालयों पर लोड खत्म होगा।
- डॉ. एसके बाली, पूर्व एचओडी, नेफरोलॉजी विभाग, सुपर स्पेशियलिटी जम्मू