अदालत ने कहा जब भी ऐसी संपत्ति को पट्टे पर देने या आवंटित करने की आवश्यकता होती है, तो उसे अधिकतम राजस्व प्राप्त करना चाहिए ताकि ऐसी राशि का उपयोग निकासी की संपत्तियों के संरक्षण और रखरखाव के लिए किया जा सके।
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी संपत्ति के संरक्षण और उसका बेहतर उपयोग देखभाल करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है। इसके साथ ही अदालत ने बडगाम में 40 कनाल जमीन तीसरी पार्टी को स्थानांतरित करने संबंधी याचिका को निस्तारित कर दिया। उच्च न्यायालय कस्टोडियन के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
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जिसमें याचिकाकर्ता, जिसे हस्तांतरण के माध्यम से बडगाम के औद्योगिक इलाके में 40 कनाल पट्टे की जमीन मिली थी उसने तीसरी पार्टी को 12 माह के भीतर तीन किस्तों में 1.28 करोड़ की राशि के भुगतान के लिए कहा था। इस जमीन को 40 वर्ष के लिए पूर्व के पट्टेदार को 1998 में आवंटित किया गया था, और 17 वर्ष बाद इसकी अवधि पूरी हो जाएगी।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कस्टोडियन की जिम्मेदारी होती है कि वह खाली पड़ी इस जमीन को इस तरह प्रशासित करे कि जो जम्मू-कश्मीर राज्य निकासी (संपत्ति का प्रशासन) अधिनियम संवत 2006 के उद्देश्य को आगे बढ़ाता हो। अदालत ने कहा कि इस बात पर जोर देने की जरूरत नहीं है कि अधिनियम का उद्देश्य संपत्ति का संरक्षण और रखरखाव करना है और इस तरह के संरक्षण और रखरखाव के लिए राजस्व जुटाने के लिए संपत्ति को सर्वोत्तम संभव लाभकारी उपयोग में लाना है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी विशिष्ट प्रावधान के अभाव में कस्टोडियन को यह तय करने का अधिकार है कि संपत्ति को इस तरह से आवंटित या पट्टे पर दिया जाए कि उससे अधिक राजस्व हासिल हो।