अरनिया में हुए आतंकी हमले को अंजाम देने में आतंकवादियों ने दो गाइडों (स्थानीय मददगार) का सहारा लिया था। एक गाइड ने उन्हें खेतों तक पहुंचाया, दूसरे को उन्हें आगे लेकर जाना था। वह दूसरे गाइड का इंतजार करते रहे। जब वह नहीं पहुंचा तो खुद ही आगे बढ़ने लगे। इसी बीच टीए बटालियन के जवानों को देखकर उन्होंने हमला बोल दिया।
सेना की टीए बटालियन के जवानों ने आतंकवादियों को खेतों में आग सेंकते हुए देखा था। जब तक उनको पकड़ा जाता, तब तक वह हमला कर चुके थे। कई ऐसे पहलु हैं, जिनसे यह बात सामने आ रही है कि आतंकवादियों को घुसपैठ में गाइड ने मदद की। मदद से ही वे दो किलोमीटर के समतल इलाके में घुसपैठ कर अंदर तक पहुंच गए।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस दिन अरनिया सेक्टर में फायरिंग हुई, उस दिन बीती रात ही आतंकवादियों ने कठार से दो किलोमीटर दूर अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की। दूसरे गाइड का इंतजार में ही उन्होंने पराली की आग जलाई, इसी आग को सेना के जवानों ने देखा था।