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अरनिया मुठभेड़ में चौंकाने वाला खुलासा, पढ़ें खबर

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अरनिया में हुए आतंकी हमले को अंजाम देने में आतंकवादियों ने दो गाइडों (स्थानीय मददगार) का सहारा लिया था। एक गाइड ने उन्हें खेतों तक पहुंचाया, दूसरे को उन्हें आगे लेकर जाना था। वह दूसरे गाइड का इंतजार करते रहे। जब वह नहीं पहुंचा तो खुद ही आगे बढ़ने लगे। इसी बीच टीए बटालियन के जवानों को देखकर उन्होंने हमला बोल दिया।
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सेना की टीए बटालियन के जवानों ने आतंकवादियों को खेतों में आग सेंकते हुए देखा था। जब तक उनको पकड़ा जाता, तब तक वह हमला कर चुके थे। कई ऐसे पहलु हैं, जिनसे यह बात सामने आ रही है कि आतंकवादियों को घुसपैठ में गाइड ने मदद की। मदद से ही वे दो किलोमीटर के समतल इलाके में घुसपैठ कर अंदर तक पहुंच गए।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस दिन अरनिया सेक्टर में फायरिंग हुई, उस दिन बीती रात ही आतंकवादियों ने कठार से दो किलोमीटर दूर अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ की। दूसरे गाइड का इंतजार में ही उन्होंने पराली की आग जलाई, इसी आग को सेना के जवानों ने देखा था।
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आतंकी कैसे पहुंचे कठार गांव तक

कठार गांव के पास ही टीए बटालियन का नाका है। जवानों ने आतंकियों को यहां पर आग सेंकते हुए देखा और अपने अधिकारियों को सूचित किया। जब तक अधिकारियों ने कार्रवाई करने के आदेश दिए तब तक आतंकी आगे बढ़ गए। आतंकी जब सेना के बंकर के पास पहुंचे तो जवानों को देखकर बौखलाहट में हमला बोल दिया।

इस बौखलाहट की वजह से पहले उन्होंने ट्रैक्टर पर सवार दो लोगों को मौत के घाट उतारा। इसके बाद जवानों को निशाना बनाया, फिर मारुति में सवार दो लोगों को मारा। एक बाइक सवार भी आगे आ पहुंचा, जिसने वापस जाने की कोशिश की, लेकिन आतंकियों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

गाइड ने आतंकियों को भारतीय करंसी के हजार-हजार के दो नोट और डेयरी मिल्क के चाकलेट दिए थे। सेना के प्रवक्ता मुनीष मेहता का कहना है कि, अभी सेना हर पहलु की जांच कर रही है। वहीं स्‍थानीय पुलिस को भी इसकी जानकारी मिली है, पुलिस भी अपने स्तर पर गाइडों का पता लगा रही है।
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