यह मुठभेड़ पिछले साल सितंबर में कोकरनाग के सामान्य इलाके में हुए इसी तरह के अभियान की याद दिलाती है, जिसमें कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष और डिप्टी एसपी हुमायूं भट सहित चार सुरक्षाकर्मी आतंकवादियों के साथ एक सप्ताह तक चली मुठभेड़ में मारे गए थे।
उस अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक वरिष्ठ कमांडर सहित दो आतंकवादियों को भी मार गिराया गया था। 15 जुलाई को डोडा जिले में हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने कोकरनाग के जंगलों में अपने अभियान तेज कर दिए हैं। मुठभेड़ में एक कैप्टन समेत चार जवान बलिदान हो गए थे।
माना जा रहा है कि अनंतनाग की हालिया घटना में शामिल आतंकवादी डोडा में मुठभेड़ से बचकर किश्तवाड़ जिले से घुस आए हैं। श्रीनगर स्थित रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि 10 अगस्त को दोपहर करीब 2 बजे संदिग्ध गतिविधि देखी गई। चुनौती देने पर आतंकवादियों ने तुरंत अंधाधुंध, हताश और लापरवाह गोलीबारी की, जिसमें दो सैन्यकर्मी और आसपास के दो नागरिक घायल हो गए।
प्रवक्ता ने कहा कि यह क्षेत्र 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर है, यहां घने जंगल, बड़े-बड़े पत्थर और नाले हैं, जो ऑपरेशन के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं। सुरक्षा बल आतंकवादियों को पकड़ने की प्रक्रिया में हैं। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि सुरक्षा बल क्षेत्र में आतंकवादियों का पीछा कर रहे हैं।