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बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी

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विशनह क्षेत्र में बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसलों के नुकसान का बार एसोसिएशन के प्रधान एमके भारद - फोटो : RSPURA
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ज्यौड़ियां। कई राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रविवार को खौड़ और ज्यौड़ियां क्षेत्र का दौरा कर बारिश से धान की फसल के हुए नुकसान का जायजा लिया। किसानों को भरोसा दिया कि हम आपके साथ हर दुविधा में खड़े हैं। फसल के नुकसान की जल्द भरपाई कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। क्योंकि बेमौसम बारिश ने आप किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
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आल इंडिया भाऊ बिरादरी के प्रधान व भाजपा कार्यकारिणी सदस्य नरेंद्र सिंह भाऊ ने शनिवार की शाम खौड़, मट्टू, हमीरपुर, जटटां दे कोठे आदि का दौरा कर बारिश से क्षेत्र के किसानों के हुए नुकसान के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार से आपके नुकसान की भरपाई के लिए आपके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा की किसान अन्नदाता है। खुद भूखा रह कर सबका पेट भरता है, लेकिन अगर अब अन्नदाता पर ही मुश्किल आई है तो हम सब उनके साथ एक हो खड़े हैं।
खौड़ के पलांवाला क्षेत्र का नेशनल कांफ्रेंस के नेता बलदेव सिंह भाऊ ने पलांवाला, पंजतूत, पलातन, दड खौड़ आदि गांवों का दौरा कर किसानों से मिले और भरोसा दिया कि हम इस दुख की घड़ी में आपके साथ खड़े हैं। आपकी बात को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। बलदेव सिंह ने बताया कि किसानों के बहुत नुकसान हो गया है और इस दुखद घड़ी में सभी लोगों को राजनीति से ऊपर उठ कर सभी राजनीतिक पार्टियों के लोगों को किसानों के साथ खड़े रहना कहिये और उन्हें सरकार से हर संभव मदद दिलाने के प्रयास करने चाहिए।
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किसान कांग्रेस नेता भारत प्रिय ने भारी बारिश और ओले गिरने से किसानों के हुए नुकसान का सरकार से उचित मुआवजा दिए जाने की मांग उठाई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जब किसानों की धान, दालों, मक्की, बाजरा तथा तिल की फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो चुकी थी तो किसानों की मेहनत पर मौसम की मार पड़ गई है। इसलिए सरकार को चाहिए कि किसानों के नुकसान की जल्द भरपाई की जाए।
सामाजिक कार्यकर्ता व डोगरा सदर सभा खौड़ के प्रधान सुखदेव सिंह भाऊ ने किसानों के नुकसान की भरपाई करने के साथ-साथ सरकार से किसानों की केसीसी की किश्त माफ करने की मांग की है। उपजिला खौड़ कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शाम चौधरी ने भी क्षेत्र में किसानों के नुकसान का जायजा लिया और सरकार से किसानों की हर संभव मदद करने के लिये कहा, उन्होंने कहा कि किसानों के पास जितनी भी जमा पूंजी थी। वह फसल उगाने में खर्च कर दी थी, और अब उनके पास पैसे आने थे, लेकिन मौसम की मार ने उनका सब कुछ नष्ट कर दिया। इसलिए सरकार को चाहिए कि उनकी जल्द से जल्द आर्थिक मदद की जाए। ताकि वह लोग अपना तथा अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
बारिश रुकते ही खेतों में पहुंचे किसान
शत प्रतिशत धान की फसल तबाह, आंकलन करने नहीं पहुंचा प्रशासन
अरनिया। कुदरती आपदा के दूसरे दिन भी राज्य प्रशासन की ओर से कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे आज भी किसानों को अपना दुखड़ा व फरियाद करने के लिए निराश ही हाथ लगी। हालांकि आज भी किसानों पर लॉलीपॉप का मरहम लगाने कई नेता पहुंच कर किसानों से जरूर मिले।
उल्लेखनीय है कि शनिवार सुबह आंधी भारी बारिश व ओले से किसानों की सौ प्रतिशत धान की फसल खराब हो गई थी। किसान व पूर्व सरपंच डॉक्टर रघुबीर सिंह का कहना है कि राज्य प्रशासन को हमारी सुध लेनी चाहिए थी। मगर शायद केंद्रीय मंत्री के दौरे से यहां नहीं पहुंच सके। पंचायत हल्का अला के नायब सरपंच व किसान लबली चाढ़क का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी किसानों को भरोसा देने के लिए प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का आकलन भी नहीं किया गया, जिससे लगता है राज्य प्रशासन इस त्रासदी को लेकर इतना गंभीर नहीं है।
कहा दाने पूरे झड़ चुके हैं और जो खेतों में गिरी है वो भी पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। राज्य प्रशासन से हमारी गुजारिश है कि जल्द से जल्द इसका मुआवजा दिया जाय, ताकि हम किसानों को कुछ हद तक राहत मिल सके।
फसल का मुआयना करने जुटे किसान
परगवाल। छह माह की मेहनत के बाद जब किसानों को उसका फल मिलता नजर आने लगता है, तब कुदरत ऐसा घटित करती है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी हैं। कृषि प्रधान क्षेत्र परगवाल में शनिवार को बारिश और ओले गिरने से किसानों की धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है।
रविवार को मौसम में थोड़ा सुधार होते ही किसानों ने खेतों में पहुंचकर फसल का मुआयना किया और उसे देखकर चिंता व्यक्त की। हालांकि शाम को एक बार फिर मौसम ने करवट बदली और काले बादल छा गए। किसान एक बार फिर मायूस हो गये। स्थानीय किसान रमेश सिंह, राकेश सिंह, रतन लाल ने बताया कि उनकी बासमती की फसल पक कर लगभग तैयार थी और वह एक दो दिन के अंदर कटाई करने वाले थे, लेकिन शनिवार को बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है। अब उनको समझ नहीं आ रही है कि अब वह क्या करें।
किसान नरेंद्र सिंह का कहना था कि ओले गिरने से सबसे ज्यादा नुकसान बासमती को हुआ है। क्योंकि फसल गिरने और खेतों में पानी जमा होने से बचा दाना काला पड़ने की संभावना है, जिससे उनकी छह माह की मेहनत बेकार चली जाएगी और उनको खाने के लाले पड़ जाएंगे। वहीं क्षेत्र के किसानों ने सरकार से किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की बात भी कही।
ज्ञात रहे परगवाल कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं। शनिवार को बारिश के साथ गिरे ओले से किसानों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा, जिसको लेकर किसान चिंतित हैं।
सलाहकार से की मुआवजे पर की बातचीत
अखनूर। जम्मू-कश्मीर किसान एडवाइजरी बोर्ड के पूर्व उप अध्यक्ष दलजीत सिंह चिब ने बारिश और ओले गिरने से धान, मक्की, बाजरे की फसल क्षतिग्रस्त होने पर उपराज्यपाल के सलाहकार फारूख खान पर फोन पर बातचीत की। उनको क्षेत्र में हुए नुकसान के बारे में अवगत कराया। आग्रह किया कि फसलों के नुकसान की भारपाई के लिए मुआवजा राशि की घोषणा की जाए। ताकि किसानों को राहत मिल सके। सलाहकार ने उप मुआवजा की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का आश्वासन दिया। संवाद
बार अध्यक्ष ने किया फसलों के नुकसान का जायजा
बिश्नाह। जम्मू बार एसोसिएशन के प्रधान और कांग्रेस नेता एमके भारद्वाज ने क्षेत्र और सीमावर्ती अरनिया क्षेत्र में बारिश, आंधी और ओले के कारण बरबाद हुई फसलों का जायजा लिया। उनके साथ कांग्रेस नेता अशोक दुबे भी रहे।
उन्होंने रिहाल बरमाल चक, चिमना, मजुया, पंडरिया और सीमावर्ती गांव अरनिया का भी दौरा किया। रेहाल के नंबरदार सौदागर मल ने बताया कि इस बारिश और ओले के कारण फसल शत प्रतिशत बरबाद हो चुकी है। किसान इससे बेहद ही निराश हो चुका है। अब राज्य प्रशासन ने किसानों के लिए बड़ी राहत घोषणा कर उनके जख्मों पर मरहम लगाना चाहिए। एमके भारद्वाज ने कहा कि हमारे सीमावर्ती किसान तो सबसे ज्यादा बेबस हैं। कभी ओले कभी भारी बारिश और कभी पाकिस्तान की गोलाबारी से किसान फसल नहीं संभाल पा रहे हैं। मैं इस मुश्किल घड़ी में किसानों के साथ हूं। संवाद
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