हीरानगर। गांधी जयंती पर मढ़ीन में शुरू हुआ किसानों का धरना रविवार को भी जारी रहा। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस दौरान किसानों ने दिल्ली में आंदोलन कर रहे किसानों का समर्थन करते हुए तीनों नए कृषि कानून रद्द करने की मांग भी की। किसान नेता शिवदेव सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा उन्हें अब तक नहीं मिला। तत्कालीन उपायुक्त ने कठुआ में फसल बर्बाद होने पर 28 करोड़ के नुकसान की जानकारी सरकार को लिखित में दी थी। उसके पूरे दस्तावेज हैं। लेकिन, अब तक यह मुआवजा नहीं मिला है। इसके अलावा 2020 में भी गेहूं की बुआई नहीं हो पाई थी। इसका मुआवजा भी अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि किसानों को बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा दिया नहीं जा रहा। लेकिन, बिजली के मोटे बिल भेजे जा रहे हैं। इससे किसान बेहद परेशान हैं। पंजाब में किसान बासमती नहीं बेच पा रहे हैं। यहां भी बासमती का उचित दाम नहीं मिल रहा है। खरीद केंद्रों पर ठेकेदारों का कब्जा होने के कारण भी किसानों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धरने पर नेकां नेता धर्मपाल कुंडल, मखनी बंद्राल, आदि भी मौजूद रहे।