कठुआ। जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने की अखिल भारतीय जाट महासभा के अध्यक्ष चौधरी मनमोहन सिंह ने एक बार फिर से मांग उठाई है। रविवार को कठुआ में आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने सरकार से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराने से पहले समुदाय के सदस्यों को ओबीसी का दर्जा देने का आग्रह किया है।
अखिल भारतीय जाट महासभा के तहसील प्रधान चौधरी सतपाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान बिरादरी के सैकड़ों सदस्य इकट्ठा हुए। इस दौरान राज्य प्रधान ने कहा कि देश के 11 राज्यों में जाट बिरादरी को ओबीसी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन जम्मू कश्मीर में उन्हें इस हक से महरूम रखा गया है। पहले अनुच्छेद 370 को जाट समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने में बाधा बताया जा रहा था, जो कि अब समाप्त हो गई। लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा जाटों की वर्षों पुरानी मांग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हाल के दिनों में हुए परिसीमन के बाद जाट बाहुल क्षेत्र वाले विधानसभा सीटों को आरक्षित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आज से पचास साल पहले शरणार्थी के तौर उन्हें जो जमीन दी गई थी, उसका भी मालिकाना हक नही दिया गया। इससे सरकार निर्माण के लिए जब भी उस जमीन का अधिग्रहण करती है तो उन्हें उसका कोई मुआवजा भी नही मिला पाता है। वहीं तारबंदी के पास पड़ने वाली उनकी जमीनों पर जहां खेती नही हो पा रही है। उसका भी कोई मुआवजा नही दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जाटों के इन मसलों को हल करने के लिए कोई कार्रवाई नही करती तो आने वाले चुनावों में जाट बिरादरी सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ अपने मताधिकार का उपयोग करेगी। वहीं सभा को जिला में सक्रिय बनाने के लिए जिला इकाई के नए प्रधान अवतार सिंह और उपप्रधान सुदेश कुमार के नामों की भी उन्होंने घोषिण की। इस मौके पर सभा के राज्य उपप्रधान दीवान चंद, जाट महासभा की युवा शाखा के सतीश कुमार, यशपाल, चुन्नी लाल, राकेश कुमार, प्रकाश चंद, लेख राज, दर्शन सिंह आदि भी मौजूद रहे।