सावन चक गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गुरु की महिमा का बखान करते रागी। संवाद
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कठुआ। सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाशोत्सव सावन चक के गुरुद्वारा सिंह सभा में श्रद्धा के साथ मनाया गया। शुक्रवार को सुबह सबसे पहले गुरुद्वारा साहिब में जारी पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद दिवान सजाकर रागी जत्थों सहित प्रचारकों ने गुरु की महिमा का गुणगान किया। कार्यक्रम के दौरान जिले भर से आई बड़ी संख्या में संगत ने गुरु के दरबार में हाजिरी लगाई। वहीं एसएसपी रमेश चंद्र कोतवाल के साथ विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं व शहर के गणमान्य लोगों ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर गुरु का आशीष प्राप्त किया।
समागम के दौरान स्थानीय रागी जत्थों ने गुरु महिमा का गुणगान करते हुए संगत को निहाल कर दिया। वहीं रागी जत्थों में शामिल दरबार साहिब अमृतसर से आए भाई विक्रमजीत सिंह और जम्मू के हजूरी रागी भाई चरणप्रीत सिंह, कठुआ जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के रागी जत्थों ने शबद कीर्तन से माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसी बीच बाटला से आए प्रचारक भाई लखविंदर सिंह ने भी गुरु जी की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कार्तिक मास की पूर्णमासी 1469 को पिता कल्याण दास व माता तृप्तिा देवी के घर श्री गुुरुनानक देव का जन्म हुआ। गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव का उद्देश्य समाज के लोगों को उनकी शिक्षाओं के माध्यम से समाज में फैली हुई कुरीतियों, नशा, दहेज प्रथा, जुआ के चंगुल से छुटकारा दिलवाकर सही जीवन जीने के लिए मार्ग दिखाना है। गुरु जी की शिक्षाएं आज भी देश व समाज को नया रास्ता दिखाने में अहम भूमिका निभा रही है। आज जरूरत है तो गुरुओं के दिखाए रास्ते को अपनाने की व गुरुओं की शिक्षाओं को अपने जीवन में धारण करने की है। गुरु नानक देव की शिक्षाओं बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि गुरु नानक जी का मुख्य उद्देश्य मानवतावाद व भाई चारे की भावना को प्रबल बनाकर विश्व में शांति स्थापित करना था। वह आपसी भाईचारे के प्रबल समर्थक होने के साथ धार्मिक कट्टरवाद के विरोधी थे। इसी भावना के चलते उन्होंने हिन्दू व मुस्लिम लोगों में आपसी भाईचारा स्थापित करने में काफी योगदान दिया। उनकी शिक्षाएं आज भी समाज के लिए प्रेरणा का कार्य कर रही हैं।
वहीं, गुरुद्वारा साहिब सावन चक के प्रधान मास्टर सुजान सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने आपसी भाईचारे और ऊंच-नीच के भेदभाव को खत्म करने का संदेश हमें दिया है। इसलिए हमें इसी संदेश को आगे लेकर जाना होगा। आज की नई पीढ़ी को भी गुरु जी के बताए गए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि धर्म और समाज दोनों का भला हो सके। उन्होंने जो संदेश हमें दिया है अगर उसे हम अपने जीवन में अपनाएं तो इससे समाज और धर्म दोनों का भला होगा। कार्यक्रम का समापन अरदास और प्रसाद वितरित करने के साथ हुआ। समागम के दौरान लंगर का भी आयोजन किया गया।
सावन चक स्थित गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित संगत। संवाद- फोटो : KATHUA