फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कांग्रेस में घमासान, अनुशासन तोड़ने के आरोप में पार्टी ने 10 नेताओं को किया बाहर

Sun, 24 Nov 2019 10:10 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
प्रियंका गांधी वाड्रा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
विज्ञापन

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासन तोड़ने के आरोप में अपने दस नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें सन्तोष सिंह, सिराज मेहंदी, रामकृष्ण द्विवेदी, सत्यदेव त्रिपाठी, राजेन्द्र सिंह, भूधर नारायण मिश्रा, विनोद चौधरी, नेकचंद पांडे, स्वयं प्रकाश गोस्वामी और संजीव सिंह शामिल हैं। इन नेताओं पर कुछ दिन पूर्व संगठन में किए गए बदलाव का खुले में विरोध करने का आरोप था। 

विज्ञापन


इन नेताओं को अपना पक्ष रखने के लिए अखबार के जरिए नोटिस जारी किया गया था जिसका उचित जवाब न मिलने के बाद पार्टी ने यह कदम उठाया है। दरअसल, पार्टी के अंदर का यह घमासान प्रियंका गांधी के द्वारा संगठन में बड़ा बदलाव किए जाने के बाद शुरू हुआ था। यूपी में कांग्रेस को एक बार फिर से मजबूत करने के लिए कठोर रणनीति अपना रहीं प्रियंका गांधी ने संगठन में बड़े बदलाव कर दिए। 

लम्बे समय से बड़े-बड़े पदों पर बैठे 'मठाधीशों' को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और उनकी जगह नए चेहरों को महत्त्व दिया गया। प्रदेश अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति के साथ ही युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई। इसे प्रियंका गांधी की यूपी के अगले विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी तैयारी बताया जा रहा है। 
विज्ञापन


लेकिन प्रियंका गांधी की इस कोशिश ने पुराने दिग्गजों को काफी असहज कर दिया। उनकी नाराजगी सामने आने लगी। इससे पार्टी को असहज स्थिति का सामना भी करना पड़ा। लेकिन पार्टी को मजबूत करने में जुटी प्रियंका गांधी ने किसी की परवाह किए बिना अपना अभियान जारी रखा। 

क्या कहते हैं पार्टी नेता

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए नेतृत्व जो बेहतर समझ रहा है, वह कदम उठा रहा है। इसे किसी भी साथी के द्वारा अनुचित ढंग से नहीं लिया जाना चाहिए। पार्टी सही समय पर सबको सेवा का अवसर देती है। अगर किसी तरह की असहमति भी है तो उसे पार्टी के उचित फोरम पर रखा जाना चाहिए। 

प्रेस कांफ्रेंस से अपनी बात रखेंगे निकाले गए नेता

वहीं, पार्टी से निकाले गए पूर्व विधायक विनोद चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि उन लोगों ने ऐसा कोई भी काम नहीं किया है जिसे पार्टी के द्वारा गलत कहा जा सके। लेकिन कुछ लोगों की गलत सलाह के कारण संगठन में इस तरह का फैसला लिया गया है। 

उन्होंने कहा कि उन्हें उनका पक्ष रखने के लिए भी उचित समय नहीं दिया गया है। उन्हें कोई नोटिस तक प्राप्त नहीं हुआ है। वे सभी साथियों के साथ मिलकर सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखेंगे। 

उन्होंने कहा कि पूर्व में भी युवाओं को भागीदारी दी जाती थी लेकिन ऐसा करते हुए उन लोगों को कभी भी हाशिए पर नहीं रखा गया जिन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी के लिए लगा दिया है। इस तरह का फैसला लेने से पहले सम्बंधित नेताओं से बातचीत किया जाना चाहिए था। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें