उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासन तोड़ने के आरोप में अपने दस नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इनमें सन्तोष सिंह, सिराज मेहंदी, रामकृष्ण द्विवेदी, सत्यदेव त्रिपाठी, राजेन्द्र सिंह, भूधर नारायण मिश्रा, विनोद चौधरी, नेकचंद पांडे, स्वयं प्रकाश गोस्वामी और संजीव सिंह शामिल हैं। इन नेताओं पर कुछ दिन पूर्व संगठन में किए गए बदलाव का खुले में विरोध करने का आरोप था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए नेतृत्व जो बेहतर समझ रहा है, वह कदम उठा रहा है। इसे किसी भी साथी के द्वारा अनुचित ढंग से नहीं लिया जाना चाहिए। पार्टी सही समय पर सबको सेवा का अवसर देती है। अगर किसी तरह की असहमति भी है तो उसे पार्टी के उचित फोरम पर रखा जाना चाहिए।
वहीं, पार्टी से निकाले गए पूर्व विधायक विनोद चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि उन लोगों ने ऐसा कोई भी काम नहीं किया है जिसे पार्टी के द्वारा गलत कहा जा सके। लेकिन कुछ लोगों की गलत सलाह के कारण संगठन में इस तरह का फैसला लिया गया है।
उन्होंने कहा कि उन्हें उनका पक्ष रखने के लिए भी उचित समय नहीं दिया गया है। उन्हें कोई नोटिस तक प्राप्त नहीं हुआ है। वे सभी साथियों के साथ मिलकर सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस के जरिए अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखेंगे।
उन्होंने कहा कि पूर्व में भी युवाओं को भागीदारी दी जाती थी लेकिन ऐसा करते हुए उन लोगों को कभी भी हाशिए पर नहीं रखा गया जिन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी के लिए लगा दिया है। इस तरह का फैसला लेने से पहले सम्बंधित नेताओं से बातचीत किया जाना चाहिए था।