एक नई पहल के तहत केंद्रीय मंत्री 'चिंतन शिविर' में शामिल होने के लिए कारपूलिंग का उपयोग कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों की बैठकों को चिंतन शिविर नाम दिया गया है। सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि इन बैठकों का आयोजन दक्षता, सेवाओं के वितरण और समग्र शासन में सुधार लाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि दक्षता, समय प्रबंधन, परियोजनाओं, नीतियों के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करना और हितधारकों के साथ व्यवहार को लेकर अब तक ऐसी तीन बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। वहीं, इस श्रृंखला में चौथी बैठक का आयोजन मंगलवार को होना है।
सूत्रों के अनुसार कारपूलिंग व्यवस्था को अपनाने की शुरुआत तीसरी बैठक से हुई। एक कैबिनेट मंत्री के साथ आमतौर पर एक ही कार में दो राज्य मंत्री होते हैं। इस अभ्यास का उद्देश्य मंत्रियों के बीच बातचीत को बढ़ाना है। राज्य के मंत्रियों का एक अलग समूह प्रत्येक बैठक में एक कैबिनेट मंत्री के साथ जाता है।
पिछले चिंतन शिविरों में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, पीयूष गोयल, गजेंद्र शेखावत, नरेंद्र सिंह तोमर और हरदीप सिंह पुरी प्रेजेंटेशन दे चुके हैं। इन प्रस्तुतियों के बाद विभिन्न प्रासंगिक विषयों पर फ्री-व्हीलिंग चर्चा भी हुई थी। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने सुझाव दिए थे।