फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Russia Ukraine War: भारत का 'भीष्म', जिसने नहीं छूटने दिया इस जंग में 'पुतिन' का साथ, क्या है 70 पार्ट्स की कहानी

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 02 Mar 2022 04:30 PM IST

सार

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, T-90 टैंक आज भारतीय सेना का टॉप टैंक माना जाता है। आज ये टैंक भारत में बन रहा है, लेकिन इसके कई अहम तकनीकी उपकरण रूस से ही मंगाए जाते हैं। अगर रूस से वे उपकरण न मिलें, तो ये टैंक अपनी जिस मारक क्षमता के लिए जाना जाता है, उससे बहुत पीछे छूट जाएगा। एक टैंक की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपये है। टैंक के अधिकांश पार्ट, जिसमें हल (निचला हिस्सा) भी शामिल है, उसे रूस से आयात किया जाता है...
विज्ञापन
विज्ञापन
रूस का मुख्य युद्धक टैंक - फोटो : Agency


टैंक की हथियार प्रणाली को लेकर फ्रांस की मदद ली गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों के बीच मधुर संबंधों के लिए अन्य हथियारों, उपकरणों में 'भीष्म' का बड़ा रोल है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी. श्रीकुमार कहते हैं, इस टैंक की दुनिया में चर्चा होती है। भीष्म को T-72 टैंक का अपग्रेड वर्जन कहा जा सकता है। इसकी मारक क्षमता अचूक है।

भारत-रूस के बीच 2021 से 2031 तक समझौता

अगर भारत, यूक्रेन की लड़ाई में रूस के खिलाफ मैदान में उतरता तो कई सुरक्षा समझौतों पर असर पड़ सकता था। जंग के तीन चार दिन बाद ही यह चर्चा जोर पकड़ने लगी कि क्या भारत इसलिए यूक्रेन का साथ नहीं दे रहा है, क्योंकि रूस के साथ उसके सामरिक हित जुड़े हैं। रक्षा तकनीक से जुड़े कई अहम उपकरणों के मामले में भारत, रूस पर निर्भर है। सी. श्रीकुमार कहते हैं, अगर भारत सरकार रक्षा उद्योग को सार्वजनिक उपक्रमों के दायरे से बाहर नहीं निकालती है, तो आने वाले समय में टैंक सहित अन्य उपकरणों को स्वदेश में ही निर्मित किया जा सकता है।



हालांकि केंद्र सरकार ने भारतीय आयुध निर्माणियों को कंपनियों में तब्दील कर दिया है। बतौर श्रीकुमार, यह एक गलत कदम है। इससे रक्षा उद्योग पर विपरित असर पड़ेगा। भारत और रूस के बीच गत वर्ष AK-203 राइफलों के लिए 5,100 करोड़ रुपये की डिफेंस डील हुई है। इन राइफलों का निर्माण उत्तर प्रदेश के अमेठी में होगा। यहां पर पांच लाख से अधिक राइफलें तैयार की जाएंगी। रूस और भारत के बीच सैन्य तकनीक के सहयोग को लेकर 2021 से 2031 तक समझौता हुआ है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next