हमारी कौन सुनेगा?
सुमित रस्तोगी क्रॉसिंग रिपब्लिक गाजियाबाद में रहते हैं। उन्हें हर रोज दफ्तर जाने के लिए ढाई किमी का चक्कर काटना पड़ता है और आधे घंटे जाम में फंसना पड़ता है। सुमित कहते हैं कि केंद्र सरकार किसानों के मुद्दे का समाधान नहीं करना चाहती और किसान धरना स्थल खाली करने को तैयार नहीं है। अब आप ही बताइए इसमें हम क्या करें? प्रो. राम को बाड़ा हिन्दूराव अस्पताल पहुंचने के लिए हर रोज मशक्कत करनी पड़ती है और काफी लंबा रूट लेकर ड्यूटी पहुंचने की फजीहत झेलनी पड़ती है। पानीपत से राजेश कौशिक हर रोज दिल्ली आते हैं। राजेश कौशिक कहते हैं कि उन्हें कई किमी लंबी दूरी तय करके पेरीफेरल एक्सप्रेस का सहारा लेना पड़ता है। कौशिक का कहना है कि आखिर हमारी सुन ही कौन रहा है?
उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद निकल आएगा हल
सुरेन्द्र मलिक किसान नेता हैं। दार्शनिक अंदाज में कहते हैं कि हर समस्या का हल समय ही निकालता है। मलिक का कहना है कि 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होना है। इसी चुनाव में भाजपा को किसानों की नाराजगी दिखाई पड़ जाएगी। इसके बाद किसानों के मुद्दे का हल भी निकल आएगा। बागपत के सूप गांव के होम्योपैथ डा. सुधीर तोमर किसानी भी करते हैं। तोमर का कहना है कि गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक का किसान तंग है। आवारा पशु खेतों को चर ले जाते हैं। किसानों की पैदावार मारी जा रही है और कई क्षेत्रों में किसानों ने छुट्टा जानवरों के कारण कई पैदावार की बुआई तक बंद कर दी है। लेकिन केंद्र सरकार की आंख नहीं खुल रही है। कासगंज के संजय अग्रवाल खेती-खलिहानी के कारोबारी हैं। बीज, खाद आदि के थोक कारोबारी हैं। संजय अग्रवाल का कहना है कि वह भाजपा से जुड़े हैं। लेकिन संजय का मानना है कि किसान उनकी पार्टी से नाराज चल रहा है। अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार को किसानों से मिल बैठकर मुद्दा सुलझा लेना चाहिए।