नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेडे पर एनसीपी प्रवक्ता व मंत्री नवाब मलिक ने शुक्रवार को नया खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वानखेड़े परिवार ने न केवल मुस्लिम धर्म अपनाने के बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाया, बल्कि कई और गड़बड़ियों में भी शामिल रहे। उन्होंने नए दस्तावेज जारी करते हुए खुलासा किया कि नाबालिग की उम्र में ही समीर वानखेडे को बार एंड रेस्टोरेंट का लाइसेंस मिल गया था।
मलिक ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि समीर वानखेडे के नाम पर एक बार एंड रेस्टोरेंट रजिस्टर्ड है। यह लाइसेंस उन्हें साल 1997 में मिला था। तब समीर वानखेडे नाबालिग थे। समीर की उम्र 18 साल नहीं हुई थी। उस वक्त उनकी उम्र 17 साल 10 माह 19 दिन थी। फिर भी उनके नाम पर बार एंड रेस्टोरेंट का लाइसेंस मिल गया था। जो कानूनन अवैध है।
मलिक ने कहा कि समीर के पिता ज्ञानदेव वानखेडे आबकारी विभाग में कार्यरत थे। इसलिए समीर के नाम पर बार का लाइसेंस मिला। वहीं, समीर वानखेडे ने मीडिया को सफाई दी है कि उन्होंने बार के बारे में जानकारी कभी नहीं छिपाई। उन्होंने अपने आयकर रिटर्न में उस संपत्ति से आय का उल्लेख किया है और सरकारी सेवा में शामिल होने के बाद पॉवर ऑफ अटार्नी उनके पिता के पास है।