गुजरात हाइकोर्ट ने शुक्रवार को एक निर्णय देते हुए साफ कर दिया कि जब तक एक पुत्र व्यस्क न हो जाए या कमाना शुरू न कर दे तब तक उसकी जिम्मेदारी माता पिता की ही होगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार कोर्ट ने यह भी साफ किया कि माता पिता एक अविवाहित पुत्री के प्रति भी पूरी तरह उत्तरदायी हैं, और उसकी शादी के लिए खर्चा करने की जिम्मेदारी भी उनकी है। हालांकि यही निर्णय पुत्र के मामले में लागू नहीं होगा।
सेक्शन 125 सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुसार माता या पिता पुत्र के 18 साल की आयु पूरी करने के बाद उसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं तब भी नहीं जब वह मानसिक या शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है।
असल में कोर्ट ने यह निर्णय तलाक की उस याचिका के संदर्भ में सुनाया जिसे विसनगर निवासी दिनेश ओझा और उनकी पत्नी नीता ने दायर किया था। पत्नी नीता ने साल 2006 में डॉक्टर का घर छोड़ दिया था और उनके खिलाफ सेटेलाइट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
दूसरी तरफ डॉक्टर दिनेश ने मेहसाणा में तलाक के लिए याचिका दायर कर दी थी। जिसके बाद पत्नी रीता ने अहमदाबाद की पारिवारिक अदालत में डॉक्टर ओझा के खिलाफ गुजारा भत्ता के लिए मुकदमा दायर कर दिया। कोर्ट ने डॉक्टर को पत्नी और बेटे को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था।